HINDI CLASS- 7: मल्हार
CHAPTER-5: (नहीं होना बीमार)
नहीं होना बीमार
मेरी समझ से
(क)(1) बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?
सही उत्तर:
• उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
• उसने गृहकार्य नहीं किया था।
बच्चे का विद्यालय जाने का मन नहीं था। इसके अलावा उसने गृहकार्य भी नहीं किया था और उसे डर था कि विद्यालय में उसे सजा मिल सकती है। इसलिए उसने बीमार होने का बहाना बनाने का निश्चय किया।
(क)(2) कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।” बच्चे ने यह निर्णय क्यों लिया?
सही उत्तर:
• घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
• इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
दिनभर बिस्तर पर पड़े रहने, भूखा रहने और अकेलेपन से परेशान होकर बच्चे को समझ आ गया कि विद्यालय जाना अधिक अच्छा है। उसे अपने बहाने का परिणाम भुगतना पड़ा, इसलिए उसने भविष्य में ऐसा न करने का निर्णय लिया।
(क)(3) “लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी” इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?
सही उत्तर:
• उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।
• उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
बच्चा वास्तव में बीमार नहीं था। लगातार बिस्तर पर पड़े रहने से वह ऊब गया था। उसका मन बाहर जाने, खेलने और लोगों को देखने का कर रहा था।
(क)(4) “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!” बच्चे के मन में यह बात क्यों आई?
सही उत्तर:
• बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
• बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।
• बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
• बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।
अस्पताल में सुधाकर काका को आराम करते, स्वादिष्ट साबूदाने की खीर खाते और सबका ध्यान प्राप्त करते देखकर बच्चे को लगा कि बीमार लोगों के बड़े ठाठ होते हैं।
(ख) आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि वे कहानी की घटनाओं और बच्चे के विचारों से पूरी तरह मेल खाते हैं। बच्चे ने विद्यालय न जाने के लिए बीमारी का बहाना बनाया था। दिनभर भूखे और अकेले रहने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। कहानी यह भी बताती है कि किसी परिस्थिति को दूर से देखकर उसके बारे में गलत धारणा बन सकती है। वास्तविकता का अनुभव होने पर ही सही समझ विकसित होती है।
मिलकर करें मिलान
शब्दों का सही मिलान कीजिए।
1. साबूदाना → 8. सागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, जिससे साबूदाना बनाया जाता है।
2. वार्ड → 1. किसी विशेष कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान।
3. नर्स → 9. रोगियों, घायलों तथा वृद्धों की देखभाल करने वाली व्यक्ति।
4. रजाई → 2. रुई से भरा हुआ गर्म ओढ़ने का वस्त्र।
5. थर्मामीटर → 3. शरीर का तापमान मापने वाला यंत्र।
6. काढ़ा → 4. जड़ी-बूटियों और औषधियों से बना पेय।
7. ड्राइक्लीनर → 5. बिना पानी के कपड़ों की सफाई करने वाला व्यक्ति।
8. ताजमहल → 6. आगरा में स्थित विश्व-प्रसिद्ध स्मारक।
9. अरहर → 7. एक प्रकार की दाल जिसे तुअर भी कहते हैं।
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिल्कुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”
इन पंक्तियों से बच्चे की शरारती सोच और उसकी बालसुलभ मानसिकता का पता चलता है। उसने विद्यालय जाने से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाने का निश्चय किया। उसे लगा कि बीमार होने से उसे आराम मिलेगा, स्वादिष्ट भोजन मिलेगा और विद्यालय भी नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन बाद में उसे समझ आया कि उसकी कल्पना और वास्तविकता में बहुत अंतर था।
(ख) “देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे।”
इन पंक्तियों में बच्चे की भूख, झुंझलाहट और निराशा व्यक्त हुई है। उसे उम्मीद थी कि बीमार बनने पर उसे स्वादिष्ट चीजें खाने को मिलेंगी, लेकिन उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला। भूख के कारण वह परेशान हो गया और मन ही मन शिकायत करने लगा। इन पंक्तियों में हास्य भी है क्योंकि बच्चा अपनी छोटी-सी इच्छा को बहुत बड़ा बनाकर प्रस्तुत कर रहा है।
सोच-विचार के लिए
(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?
अस्पताल में बच्चे को साफ-सुथरा वातावरण, बड़े-बड़े वार्ड, सफेद चादरें, लाल कंबल, चमकता हुआ फर्श, हरे परदे और खिड़कियों के बाहर झूमते हुए पेड़ बहुत अच्छे लगे। वहाँ शांति थी, ट्रैफिक का शोर नहीं था और सब लोग धीरे-धीरे बात कर रहे थे। सुधाकर काका को स्वादिष्ट साबूदाने की खीर खाते देखकर भी उसे अच्छा लगा। इसलिए उसे अस्पताल का वातावरण आकर्षक प्रतीत हुआ।
(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
हाँ, मुझे लगता है कि उसका निर्णय बिल्कुल सही था। विद्यालय में पढ़ाई, मित्रों का साथ, खेल-कूद और नई बातें सीखने के अवसर मिलते हैं। घर पर झूठा बहाना बनाकर पड़े रहने से उसे केवल ऊब, भूख और परेशानी मिली। इस अनुभव ने उसे सिखाया कि जिम्मेदारियों से बचने के लिए बहाने बनाना उचित नहीं है।
(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
शुरू में उसके मन में खुशी और उत्साह था क्योंकि उसे लगा कि उसे आराम मिलेगा। कुछ समय बाद उसके मन में ऊब, बेचैनी और अकेलापन आने लगा। जब उसे भूख लगी और खाने को कुछ नहीं मिला, तब उसके मन में झुंझलाहट, क्रोध और निराशा भी उत्पन्न हुई। अंत में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और पछतावा होने लगा।
(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि “ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।” आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?
बच्चे की कल्पना में बीमारी आराम, स्वादिष्ट भोजन और छुट्टी का साधन थी। वास्तव में बीमार होने पर व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा, कमजोरी और दवाइयों का सामना करना पड़ता है। समानता केवल इतनी है कि बीमार व्यक्ति को आराम करना पड़ता है। अंतर यह है कि वास्तविक बीमारी में कष्ट अधिक होता है, जबकि बच्चे ने केवल उसके सुखद पक्ष की कल्पना की थी।
(ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
हाँ, उस परिस्थिति में उन्होंने सही किया। उन्हें लगा कि बच्चा वास्तव में बीमार है और उसकी तबीयत ठीक नहीं है। कई बार बीमारी में हल्का भोजन या उपवास लाभदायक माना जाता है। उन्होंने बच्चे की देखभाल करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उनका उद्देश्य बच्चे को स्वस्थ करना था, न कि उसे कष्ट देना। इसलिए उनका व्यवहार उचित और जिम्मेदार था।