HINDI CLASS- 7: मल्हार
CHAPTER-1: (माँ, कह एक कहानी)
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पाठ – माँ, कह एक कहानी (मैथिलीशरण गुप्त)
मेरी समझ से
(क)(1) माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय की कहानी क्यों सुनाती है?
सही उत्तर: उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।
माँ चाहती है कि राहुल न्याय, दया और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों को समझे। इसलिए वह उसे ऐसी कहानी सुनाती है जिसमें सही और गलत का निर्णय करना पड़ता है।
(क)(2) कविता में घायल पक्षी की कहानी का उपयोग किस लिए किया गया है?
सही उत्तर:
• निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए।
• करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।
घायल हंस की घटना के माध्यम से कवि ने दया और क्रूरता के बीच के अंतर को स्पष्ट किया है। यह प्रसंग करुणा, न्याय और जीवों की रक्षा के महत्व को दर्शाता है।
(क)(3) कविता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को क्या समझ में आने लगता है?
सही उत्तर: न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।
राहुल समझ जाता है कि निर्दोष की रक्षा करना ही सच्चा न्याय है। न्याय का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि दया और मानवता की रक्षा करना भी है।
(ख) आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि पूरी कविता का मुख्य संदेश करुणा, दया और न्याय है। माँ राहुल को केवल कहानी नहीं सुना रही, बल्कि उसे जीवन के नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दे रही है। घायल हंस की घटना से यह स्पष्ट होता है कि निर्दोष प्राणी की रक्षा करना ही उचित कार्य है। अंत में राहुल भी यही निर्णय देता है कि न्याय दया का पक्ष लेता है।
मिलकर करें मिलान
सही मिलान कीजिए।
1. बेटा → 3. सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल
2. माँ → 1. यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी
3. तात (पिता) → 2. सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!”
इन पंक्तियों का अर्थ है कि यदि कोई निर्दोष व्यक्ति या प्राणी संकट में हो, तो उसकी सहायता करना हमारा कर्तव्य है। जो दूसरों की रक्षा करता है, न्याय उसी का साथ देता है। यहाँ राहुल यह स्पष्ट करता है कि न्याय केवल शक्ति का नहीं, बल्कि दया और करुणा का पक्षधर होता है। कवि ने इन पंक्तियों के माध्यम से मानवता, सहानुभूति और नैतिकता का संदेश दिया है।
(ख) “हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रहि थे स्वविषय में, गई बात तब न्यायालय में, सुनी सभी ने जानी।”
इन पंक्तियों में दयालु व्यक्ति और निर्दयी आखेटक के बीच हुए विवाद का वर्णन है। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। एक घायल हंस को बचाना चाहता था जबकि दूसरा उस पर अपना अधिकार जताता था। जब विवाद का समाधान नहीं हुआ, तब मामला न्यायालय में पहुँचा। इससे यह शिक्षा मिलती है कि किसी विवाद का निष्पक्ष समाधान न्याय के माध्यम से किया जाना चाहिए।
सोच-विचार के लिए
(क) आपके विचार से इस कविता में कौन-सी पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?
मेरे विचार से कविता की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है— “न्याय दया का दानी।” यह पंक्ति पूरी कविता का मुख्य संदेश प्रस्तुत करती है। इससे पता चलता है कि सच्चा न्याय वही है जो करुणा और मानवता का सम्मान करे। यदि न्याय में दया न हो तो वह कठोर बन जाता है। इसलिए यह पंक्ति हमें दूसरों के प्रति संवेदनशील और न्यायप्रिय बनने की प्रेरणा देती है।
(ख) आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ था?
आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क घायल हंस के अधिकार को लेकर हुआ था। आखेटक का कहना था कि उसने हंस को अपने तीर से घायल किया है, इसलिए हंस उसका है। दूसरी ओर बच्चे के पिता का मानना था कि घायल और असहाय प्राणी की रक्षा करना अधिक महत्वपूर्ण है। दोनों अपने-अपने पक्ष पर दृढ़ थे। इसी कारण विवाद न्यायालय तक पहुँच गया, जहाँ न्याय और करुणा के आधार पर निर्णय लिया गया।
(ग) माँ ने पुत्र से “राहुल, तू निर्णय कर इसका” क्यों कहा?
माँ ने राहुल से निर्णय करने के लिए इसलिए कहा ताकि वह स्वयं सही और गलत का विचार कर सके। इससे उसकी सोचने-समझने की क्षमता का विकास हो तथा उसमें न्यायप्रियता और नैतिक मूल्यों का विकास हो। माँ चाहती थी कि राहुल अपने विवेक के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना सीखे।
(घ) यदि कहानी में आप उपवन में होते तो घायल हंस की सहायता के लिए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे किया जा सकता था?
यदि मैं उपवन में होता तो सबसे पहले घायल हंस की देखभाल करता, उसके घाव का उपचार करता और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाता। मेरे अनुसार न्याय यह होता कि हंस उसी व्यक्ति के पास रहे जिसने उसकी रक्षा की है। किसी जीव को घायल करने वाला उस पर अधिकार नहीं जता सकता। इसलिए न्याय करुणा और जीव रक्षा के पक्ष में होना चाहिए।
(ङ) कविता में माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे में क्या-क्या पता चलता है?
कविता में माँ और बेटे के बीच अत्यंत स्नेहपूर्ण और आत्मीय संबंध दिखाई देता है। राहुल जिज्ञासु, चंचल और कहानी सुनने का इच्छुक बालक है। वह बार-बार प्रश्न पूछता है और कहानी में रुचि दिखाता है। दूसरी ओर माँ धैर्यवान, स्नेहमयी और शिक्षाप्रद व्यक्तित्व वाली है। वह कहानी के माध्यम से राहुल को न्याय, दया और करुणा जैसे जीवन-मूल्यों की शिक्षा देती है। दोनों के संवादों से पारिवारिक प्रेम, विश्वास और शिक्षा का सुंदर चित्र उभरकर सामने आता है।