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HINDI CLASS- 9

CH-7(मैं और मेरा देश)

CBSEChapter 7Solution

मेरे उत्तर मेरे तर्क (प्रश्नोत्तर)

प्रश्न 1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?

  • (क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
  • (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
  • (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
  • (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव

सटीक उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार

कारण: निबंध 'मैं और मेरा देश' में लेखक बताते हैं कि लाला लाजपत राय जब तक विदेश नहीं गए थे, वे अपनी समृद्धि और जीवन में पूर्णतः आनंद का अनुभव कर रहे थे। परंतु विदेशों में भारत की गुलामी का कलंक महसूस करने के बाद उनके उस 'पूर्ण आनंद' के भाव को गहरा आघात लगा।

प्रश्न 2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

  • (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
  • (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
  • (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
  • (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का

सटीक उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का

कारण: लेखक के अनुसार जो प्रश्न किसी बात को आगे बढ़ाने, उसे नए आयाम देने और विचारों को खिलने का अवसर प्रदान करते हैं, उनके उत्तर देने में एक विशेष रचनात्मक संतोष और आनंद मिलता है।

प्रश्न 3. “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में—

  • (क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
  • (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
  • (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
  • (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

सटीक उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

कारण: पराधीनता (गुलामी) के समय सबसे बड़ा नुकसान भौतिक सुख-सुविधाओं का नहीं, बल्कि देशवासियों के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान का होता है। गुलामी की स्थिति में व्यक्ति मानसिक रूप से हीनता का अनुभव करता है, इसलिए उन दिनों को 'दीन' (दयनीय) कहा गया है।

प्रश्न 4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—

  • (क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
  • (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
  • (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
  • (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

सटीक उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

कारण: कोई व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से कितना भी अमीर या साधन-संपन्न क्यों न हो, यदि उसका राष्ट्र गुलाम है, तो विदेशों में या समाज में उसे कभी वास्तविक सम्मान या गौरव प्राप्त नहीं हो सकता। राष्ट्र की स्वतंत्रता ही नागरिक के गौरव का आधार होती है।

प्रश्न 5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ़ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?

  • (क) देश और नागरिक
  • (ख) देश और संविधान
  • (ग) देश और विदेश
  • (घ) व्यवसाय और आजीविका

सटीक उत्तर: (क) देश और नागरिक

कारण: निबंध में वर्णित दो घटनाएँ (स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक की घटना तथा पुस्तकालय से चित्र चुराने वाले तुर्की के विद्यार्थी की घटना) यह स्पष्ट करती हैं कि एक नागरिक का अच्छा या बुरा व्यवहार सीधे उसके देश के सम्मान से जुड़ा होता है। यहाँ 'गाँठ' देश और उसके नागरिक के इसी अटूट संबंध को दर्शाती है।

प्रश्न 6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

  • (क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
  • (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
  • (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
  • (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा

सटीक उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध

कारण: पूरे निबंध का मुख्य संदेश यही है कि व्यक्ति और उसका देश एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। नागरिक का हर कार्य देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाता या घटाता है। लेखक ने व्यक्ति के आचरण और देश के गौरव के बीच के इसी गहरे अंतर्संबंध और देशभक्ति के भाव को मुख्य रूप से उजागर किया है।

मेरी समझ मेरे विचार (प्रश्नोत्तर)

प्रश्न 1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तर: स्वामी रामतीर्थ जब जापान के एक स्टेशन पर अच्छे फलों की खोज कर रहे थे, तब उनके मुँह से निकला कि शायद जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। एक जापानी युवक ने इसे सुन लिया और वह कहीं से ताज़े फलों की टोकरी लाकर स्वामी जी को भेंट कर दी। जब स्वामी जी ने उसे मूल्य देना चाहा, तो उसने पैसे लेने से इनकार कर दिया और कहा—"आप इसका मूल्य देना ही चाहते हैं, तो वह यह है कि आप अपने देश में जाकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।" युवक के इस निस्वार्थ देश-प्रेम और अपने देश की प्रतिष्ठा के प्रति सजगता को देखकर स्वामी रामतीर्थ उस पर मुग्ध (प्रभावित) हो गए।

प्रश्न 2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

उत्तर:

फलों का मूल्य: जापानी युवक ने फलों के मूल्य के रूप में केवल यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश (भारत) लौटकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।

युवक के व्यक्तित्व की छवि: इस घटना से हमारे मन में उस युवक की एक सच्चे देशभक्त, स्वाभिमानी और अत्यंत जागरूक नागरिक की छवि उभरती है। वह पैसों या व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर अपने राष्ट्र के गौरव और सम्मान को सर्वोपरि मानता है। उसका आचरण यह सिखाता है कि देश की प्रतिष्ठा हर नागरिक के छोटे-से-छोटे व्यवहार पर निर्भर करती है।

प्रश्न 3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज़ तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे यह मुख्य तर्क है कि एक नागरिक का व्यक्तिगत आचरण, व्यवहार और सफलता-असफलता सीधे उसके राष्ट्र की छवि से जुड़ी होती है। हम जो भी अच्छा या बुरा कार्य करते हैं, उससे हमारे देश का सिर ऊँचा या नीचा होता है।

उदाहरण:

  • सकारात्मक उदाहरण (देश का गौरव बढ़ाना): जब जापान के एक साधारण नागरिक (युवक) ने स्वामी रामतीर्थ को फल भेंट किए, तो उसके इस अच्छे कार्य से पूरे जापान देश का गौरव बढ़ गया और स्वामी जी के मन में उस देश के प्रति सम्मान अत्यधिक बढ़ गया।
  • नकारात्मक उदाहरण (देश को कलंकित करना): इसके विपरीत, जब किसी दूसरे देश का एक छात्र किसी पुस्तकालय से दुर्लभ चित्रों के पन्ने चुराते हुए पकड़ा गया, तो उसकी इस चोरी के कारण उसके पूरे देश को बदनाम होना पड़ा और उस देश के अन्य नागरिकों के लिए भी पुस्तकालय के दरवाजे बंद कर दिए गए।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं।

मेरे अनुभव मेरे विचार (प्रश्नोत्तर)

प्रश्न 1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति और देश का संबंध परस्पर (दोनों तरफ से) होता है। जिस प्रकार देश की परिस्थितियों का असर नागरिक पर पड़ता है, ठीक उसी प्रकार नागरिक के छोटे-बड़े कार्यों का अच्छा या बुरा असर उसके देश की प्रतिष्ठा पर भी पड़ता है।

हमारे आस-पास के उदाहरण:

  • खेल के मैदान में (गौरव का उदाहरण): जब हमारे देश का कोई खिलाड़ी (जैसे ओलिंपिक में) अपनी कड़ी मेहनत से स्वर्ण पदक जीतता है, तो वह व्यक्तिगत सफलता तो पाता ही है, लेकिन साथ ही पूरे विश्व में भारत का राष्ट्रध्वज लहराता है और पूरे देश का गौरव बढ़ता है।
  • सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी (हीनता का उदाहरण): जब कोई नागरिक ऐतिहासिक स्मारकों, ट्रेनों या सड़कों पर गंदगी फैलाता है या थूकता है, तो विदेशी पर्यटकों की नज़रों में उस व्यक्ति के साथ-साथ पूरे देश की छवि खराब होती है। लोग कहते हैं कि "इस देश के लोग अनुशासित नहीं हैं।"
  • तकनीक और विज्ञान में योगदान: जब हमारे देश के वैज्ञानिक (जैसे इसरो के वैज्ञानिक) कोई नया उपग्रह अंतरिक्ष में भेजते हैं, तो उनकी व्यक्तिगत योग्यता के कारण पूरे विश्व में भारत को एक शक्तिशाली और उन्नत राष्ट्र के रूप में देखा जाता है।

प्रश्न 2. “मुझे बहुतों की अपने लिए ज़रूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की ज़रूरत का उनके लिए जवाब था।”

(क) प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।

उत्तर: मानव एक सामाजिक प्राणी है और हमारा पूरा जीवन परस्पर सहयोग पर ही टिका है। सुबह से रात तक हमारी निर्भरता और सहयोग के अनुभव निम्नलिखित हैं:

  • दूसरों से मिलने वाला सहयोग:
    • सुबह उठते ही माता-पिता से भोजन, चाय और दिनचर्या की अन्य चीज़ों में सहयोग मिलता है।
    • स्कूल जाने के लिए बस या ऑटो चालक हमें सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचाते हैं।
    • विद्यालय में शिक्षक हमें ज्ञान और सही दिशा देकर हमारा मार्गदर्शन करते हैं।
    • सफाई कर्मचारी हमारे आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं।
  • दूसरों को हमारे द्वारा दिया जाने वाला सहयोग:
    • हम कक्षा में अपने सहपाठियों (दोस्तों) को पढ़ाई में या छूटे हुए गृहकार्य को पूरा करने में मदद करते हैं।
    • घर पर माता-पिता के छोटे-मोटे कार्यों (जैसे बाज़ार से सामान लाना, पौधों में पानी देना) में हाथ बंटाते हैं।
    • रास्ते में किसी वृद्ध या असहाय व्यक्ति को सड़क पार कराने या रास्ता बताने में सहयोग करते हैं।

(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: लेखक के अनुसार रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ का दायरा अत्यंत व्यापक है। इसमें हमारे समाज का हर वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष व्यक्ति शामिल है जो व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में योगदान देता है। अनुमान के आधार पर इसमें निम्नलिखित लोग सम्मिलित होंगे:

  • पारिवारिक सदस्य: माता, पिता, भाई, बहन और अन्य रिश्तेदार।
  • व्यावसायिक और सेवा प्रदाता: किसान (जो अन्न उगाते हैं), दूधवाले, सब्जी विक्रेता, डाकिया, धोबी, मोची और दर्जी।
  • सामाजिक सुरक्षा और विकास से जुड़े लोग: शिक्षक, डॉक्टर, सैनिक, पुलिसकर्मी और सफाई कर्मचारी।
  • सहयोगी मित्र: सहपाठी, पड़ोसी और मित्र मंडली।

मेरे अनुभव मेरे विचार (विस्तृत प्रश्नोत्तर)

प्रश्न 2 (ग). रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: एक रचनाकार (लेखक) समाज से अलग होकर रचना नहीं कर सकता। उसे अपने जीवन और लेखन दोनों के लिए समाज के सहयोग की आवश्यकता होती है:

  • रचनाकार को दूसरों से मिलने वाला सहयोग: रचनाकार को अपने विचारों को पुस्तक के रूप में ढालने के लिए प्रकाशकों, प्रिंटर और वितरकों के सहयोग की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, उसे अपनी कहानियों या निबंधों के पात्रों और विषयों के लिए आम लोगों की जीवनशैली, उनके अनुभवों और समाज की घटनाओं से प्रेरणा मिलती है।
  • रचनाकार द्वारा दूसरों को दिया जाने वाला सहयोग: रचनाकार समाज को वैचारिक और मानसिक सहयोग प्रदान करता है। वह अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों और बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाता है। वह लोगों को प्रेरित करता है, उनका मनोरंजन करता है और भावी पीढ़ी को जीवन जीने का सही मार्ग दिखाता है।

प्रश्न 3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”

(क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश "युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता" के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं?

उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि देश की रक्षा और विकास केवल युद्ध के मैदान में बंदूक उठाने से नहीं होता। सीमाओं पर लड़ना सैनिकों का काम है, लेकिन देश के भीतर रहकर हम नागरिक भी निम्नलिखित दायित्वों को पूरा करके देश की सुरक्षा और विकास में योगदान दे सकते हैं:

  • कानून और अनुशासन का पालन: यातायात के नियमों का पालन करना, समय पर ईमानदारी से कर (टैक्स) चुकाना और देश की आंतरिक शांति बनाए रखना।
  • संसाधनों की बचत: बिजली, पानी, ईंधन और भोजन की बर्बादी को रोकना ताकि राष्ट्र के संसाधन सुरक्षित रहें।
  • सद्भाव और एकता: जाति, धर्म या भाषा के नाम पर आपसी भेदभाव को भूलकर देश में भाईचारा बनाए रखना।
  • शिक्षित और जागरूक बनना: अपनी शिक्षा का उपयोग देश के विकास, अनुसंधान और तकनीकी प्रगति के लिए करना।

(ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं?

उत्तर: हमारे आस-पास रहने वाले बेजुबान पशु-पक्षियों (जैसे आवारा कुत्ते, गाय, पक्षी आदि) का जीवन हर दिन एक नया संघर्ष होता है। हम उनके संघर्ष को निम्नलिखित रूपों में देख सकते हैं:

  • भोजन और पानी की तलाश: उन्हें चिलचिलाती धूप या कड़कड़ाती ठंड में भी भोजन के एक-एक दाने और पानी की बूंद-बूंद के लिए मीलों भटकना पड़ता है।
  • आवास का संकट: इंसानों द्वारा पेड़ काटने और शहरीकरण के कारण पक्षियों के घोंसले नष्ट हो रहे हैं और पशुओं के रहने का स्थान कम हो रहा है। उन्हें सड़कों पर गाड़ियों के बीच असुरक्षित रहना पड़ता है।
  • 'दो बैलों की कथा' से जुड़ाव: प्रेमचंद की इस कहानी के पात्र हीरा और मोती की तरह ही हमारे आस-पास के पशु भी मूक (बेजुबान) होने के कारण अपना दर्द बयां नहीं कर पाते। वे इंसानों की क्रूरता, डांट-फटकार और उपेक्षा को चुपचाप सहन करते हैं, फिर भी उनमें आपसी लगाव और प्रेम की भावना दिखाई देती है।

(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? अपने विचार लिखिए।

उत्तर: जीवन को एक 'युद्ध' इसलिए कहा गया है क्योंकि जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य का जीवन विभिन्न प्रकार की चुनौतियों, कठिनाइयों और विषम परिस्थितियों से भरा रहता है।

जिस प्रकार एक युद्ध में हर कदम पर सतर्क रहना पड़ता है और बाधाओं को पार करना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन में भी सुख-दुख, सफलता-असफलता, गरीबी और अन्य सामाजिक बुराइयों से निरंतर मुकाबला करना पड़ता है। इस युद्ध में केवल वही व्यक्ति जीतता है जो बिना हिम्मत हारे, पूरी ईमानदारी और दृढ़ता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करता रहता है।

(घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर: हमारे दैनिक जीवन को सुगम और सुरक्षित बनाने वाले मुख्य लोग और उनके प्रति हमारा कर्तव्य इस प्रकार है:

  • सफाई कर्मचारी: जो हमारी बस्तियों और सड़कों को साफ रखते हैं। हम क्या कर सकते हैं: हम कचरा हमेशा डस्टबिन में डालें ताकि उनका काम आसान हो और उनसे सम्मानपूर्वक बात करें।
  • किसान: जो हमारे लिए दिन-रात मेहनत करके अनाज उगाते हैं। हम क्या कर सकते हैं: हम भोजन की बर्बादी को पूरी तरह रोकें।
  • डॉक्टर और पुलिस: जो हमारे स्वास्थ्य और सुरक्षा की देखरेख करते हैं। हम क्या कर सकते हैं: हम सरकारी नियमों और स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करके उनके कार्य में सहयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”

(क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?

उत्तर: इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि पुराने समय में पास-पड़ोस के लोगों में गहरा आत्मीय, प्रेमपूर्ण और पारिवारिक संबंध होता था। पड़ोसी केवल बगल के मकान में रहने वाले लोग नहीं होते थे, बल्कि वे सुख-दुख के साथी होते थे। बच्चों को पूरे मोहल्ले से माता-पिता जैसा ही प्यार, दुलार और संरक्षण मिलता था। पूरे पड़ोस में ऊंच-नीच या परायापन न होकर एक सामूहिक परिवार जैसी भावना होती थी।

(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर: वर्तमान समय में इन आत्मीय संबंधों में भारी गिरावट आई है। आज लोग एक ही बहुमंजिला इमारत (फ्लैट) में रहकर भी अपने बगल के पड़ोसी को नहीं जानते।

परिवर्तन के मुख्य कारण:

  • शहरीकरण और व्यस्त जीवनशैली: आधुनिक जीवन की भागदौड़ और काम के अत्यधिक दबाव के कारण लोगों के पास आपस में बैठने और बात करने का समय नहीं बचा है।
  • तकनीक और सोशल मीडिया का प्रभाव: लोग अब प्रत्यक्ष रूप से मिलने के बजाय मोबाइल, कंप्यूटर और सोशल मीडिया पर समय बिताना अधिक पसंद करते हैं।
  • अत्यधिक निजता (प्राइवेसी) की चाह: आधुनिक सोच के कारण लोग दूसरों के हस्तक्षेप को पसंद नहीं करते, जिससे आपसी दूरियां बढ़ गई हैं।

प्रश्न 5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी क्या-क्या करते हैं?

उत्तर: हाँ, हमारी छोटी-सी लापरवाही भी सार्वजनिक सौंदर्य को ठेस पहुँचा सकती है। इसे बचाने के लिए मैं और मेरे सहपाठी मिलकर निम्नलिखित प्रयास करते हैं:

  • कचरा प्रबंधन: हम कभी भी सड़कों, पार्कों या स्कूल के मैदान में प्लास्टिक की बोतलें या रैपर नहीं फेंकते और दूसरों को भी रोकते हैं।
  • ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा: जब भी हम किसी ऐतिहासिक स्थल पर घूमने जाते हैं, तो वहाँ की दीवारों पर कुछ भी नहीं लिखते और न ही स्मारकों को कोई नुकसान पहुँचाते हैं।
  • पौधरोपण और हरियाली: हम अपने घर और विद्यालय के आस-पास खाली जगहों पर पौधे लगाते हैं और नियमित रूप से उनमें पानी देते हैं।
  • जागरूकता अभियान: समय-समय पर हम स्वच्छता चार्ट बनाकर और नारे लगाकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करते हैं।

प्रश्न 6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें?

उत्तर: देश की प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण रखने के लिए हमारे कर्तव्य (क्या करें और क्या न करें) निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझे जा सकते हैं:

क्या करें (करणीय कार्य) क्या न करें (अकरणीय कार्य)
सार्वजनिक संपत्तियों (बस, ट्रेन, स्टेशन) को साफ और सुरक्षित रखें। दीवारों पर थूककर, लिखकर या तोड़-फोड़ करके सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएं।
विदेशी मेहमानों (पर्यटकों) का सम्मान करें और 'अतिथि देवो भव' की भावना का पालन करें। विदेशी पर्यटकों के साथ ठगी, दुर्व्यवहार या अभद्र व्यवहार न करें।
हमेशा सत्य, ईमानदारी और देश के कानूनों के दायरे में रहकर कार्य करें। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, कालाबाजारी या अफवाहें फैलाने जैसे कार्यों में लिप्त न हों।
अपने राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सर्वोच्च आदर करें। सोशल मीडिया या किसी भी मंच पर अपने देश की छवि को नीचा दिखाने वाली बातें न कहें।