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HINDI CLASS- 9

CH-3(संवादहीन)

CBSEChapter 3Solution

मेरे उत्तर मेरे तर्क

पाठ ‘संवादहीन’ (लेखक: शेखर जोशी)


1. कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

सही उत्तर: (ख) ममता और स्नेह

तर्क: कहानी में ताई का कोई अपना पास नहीं रहता। गनपत द्वारा लाए गए तोते (मिट्ठू) पर वे अपनी सारी ममता बरसा देती हैं। वे उसके लिए नियमपूर्वक भोजन बनाती हैं और उसका ख्याल रखती हैं, जो एक माँ और बच्चे के बीच के निश्छल स्नेह और ममता को प्रदर्शित करता है।


2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?

सही उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता

तर्क: जगन मास्टर मिट्ठू को पिंजरे में बंद देखकर उसकी छटपटाहट और कष्ट को महसूस करते हैं। उनका अंतर्मन किसी जीव को बंधन में रखने की गवाही नहीं देता। इसलिए वे नैतिक मूल्यों और जीव मात्र के प्रति करुणा की भावना से प्रेरित होकर उसे पिंजरे से मुक्त कर देते हैं।


3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

सही उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह

तर्क: पिंजरे का द्वार खुलते ही मिट्ठू का खुले आकाश की ओर उड़ जाना यह सिद्ध करता है कि संसार के प्रत्येक जीव के लिए आज़ादी सर्वोपरि है। चाहे उसे पिंजरे में कितना भी उत्तम भोजन और स्नेह क्यों न मिले, वह अपनी स्वाभाविक स्वतंत्रता को कभी नहीं छोड़ना चाहता।


4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

सही उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव

तर्क: ताई का परिवार पहले भरा-पूरा था, लेकिन समय के साथ उनके बहू-बेटे गाँव छोड़कर शहरों में बस गए। उस बड़े घर में वे बिल्कुल अकेली रह गईं। अपनों से दूर होने के कारण उनके जीवन में बातचीत (संवाद) का पूर्ण अभाव हो गया, जो उनके गहरे मानसिक दुख और अकेलेपन का मुख्य कारण बना।


5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

सही उत्तर: (ग) अकेलापन

तर्क: इस कहानी के माध्यम से लेखक ने आधुनिक समाज की उस विसंगति (बुराई) को दर्शाया है जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन के कारण बुजुर्ग घरों में अकेले रह जाते हैं। यह कहानी समाज में वृद्धों के एकाकीपन, उपेक्षा और उनके जीवन में व्याप्त खालीपन को प्रमुखता से रेखांकित करती है।




मेरी समझ मेरे विचार

पाठ ‘संवादहीन’ के अंतर्गत दिए गए प्रश्नों के विस्तृत और प्रामाणिक उत्तर नीचे दिए गए हैं:

प्रश्न 1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

उत्तर: इस वाक्य में ताई किसी वास्तविक नाव की नहीं, बल्कि अपने जीवन रूपी नैया की बात कर रही हैं। वे यह बात अपने अत्यधिक अकेलेपन, ढलती उम्र और असहाय अवस्था से दुखी होकर कह रही हैं। उनके परिवार के सभी लोग (बहू-बेटे) उन्हें गाँव के बड़े मकान में अकेला छोड़कर शहर जा चुके हैं। घर में उनके साथ बात करने वाला या उनके सुख-दुख को साझा करने वाला कोई नहीं बचा है। जीवन के इस अंतिम पड़ाव में खुद को पूरी तरह एकाकी और बेसहारा पाकर वे अत्यंत व्याकुल हो उठती हैं और ईश्वर से गुहार लगाती हैं कि इस कष्टमय अकेले जीवन का अंत कैसे होगा और उनकी जीवन रूपी नैया कैसे पार लगेगी।

प्रश्न 2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर: इस वाक्य में ताई के परिवार के बिखरने, संयुक्त परिवार के टूटने और गाँव से शहर की ओर हुए पलायन की दुखद घटना की ओर संकेत किया गया है। एक समय था जब ताई का वह बड़ा घर बच्चों की किलकारियों, बहुओं की चहल-पहल और परिवार के सदस्यों से भरा-पूरा था। खेती-बाड़ी और घर की व्यवस्था पर ताई का पूरा नियंत्रण था। लेकिन धीरे-धीरे समय बदला, बच्चे बड़े होकर कमाने के लिए और बहुएँ सुख-सुविधाओं की तलाश में गाँव छोड़कर शहर चले गए। इसके बाद घर की जमीन-जायदाद, खेत और बाग-बगीचे बटाई या दूसरों की देखरेख में चले गए। इस प्रकार, ताई का अपना सब कुछ धीरे-धीरे उनके नियंत्रण से बाहर होकर दूसरों (पराए लोगों) के हाथों में सौंप दिया गया।

प्रश्न 3. “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?

उत्तर: ताई का हृदय मातृ-स्नेह और ममता से भरा हुआ था, लेकिन उनके बहू-बेटे और नाती-पोते उनके पास नहीं रहते थे। अपनों की इस दूरी के कारण उनकी ममता को व्यक्त होने का कोई जरिया नहीं मिल रहा था और वह उनके भीतर ही दबी हुई थी। जब गनपत उनके घर पिंजरे में बंद तोता (मिट्ठू) लेकर आया, तो उस मूक जीव को देखकर ताई का वात्सल्य भाव जाग उठा। मिट्ठू भी उनकी तरह ही उस पिंजरे में अकेला और असहाय था। ताई को उसमें अपना एक साथी दिखाई दिया, जिससे वे बात कर सकती थीं। इसी एकाकीपन को दूर करने और स्नेह की भूखी होने के कारण उनकी बरसों से संचित सारी ममता उस नन्हे मिट्ठू पर उमड़ पड़ी।

प्रश्न 4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर: इस वाक्य से पता चलता है कि मिट्ठू के आने के बाद ताई के निराश, उदास और निष्क्रिय हो चुके व्यक्तित्व में एक सकारात्मक और ऊर्जावान परिवर्तन आया था। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सक्रियता और उत्साह: जो ताई पहले अकेलेपन के कारण घर के कोने में उदास बैठी रहती थीं, अब वे मिट्ठू की पसंद का भोजन (हरी मिर्च और अमरूद) जुटाने के लिए पूरे गाँव और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने लगीं। उनके जीवन को जैसे एक नया मकसद मिल गया था।
  • संवाद और जुड़ाव: मिट्ठू की खातिर वे दूसरों से मिर्च या अमरूद माँगने लगीं, जिससे उनका गाँव के अन्य लोगों के साथ बातचीत और सामाजिक संपर्क फिर से शुरू हो गया।
  • प्रकृति और जीव-प्रेम: उनका व्यक्तित्व अब केवल अपनी चिंताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे एक बेजुबान पक्षी की खुशी के लिए प्रकृति और परिवेश से गहराई से जुड़ गईं।

प्रश्न 5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जगन मास्टर का व्यक्तित्व अत्यंत संवेदनशील, दयालु, स्वतंत्र विचारों वाला और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण था। वे रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठकर जीव मात्र की स्वतंत्रता का सम्मान करते थे। कहानी में इसके निम्नलिखित उदाहरण मिलते हैं:

  • जब उन्होंने ताई के घर में मिट्ठू को पिंजरे में बंद और छटपटाते हुए देखा, तो उनका हृदय करुणा से भर गया। वे किसी भी जीव को कैद में रखना पाप समझते थे।
  • वे ताई की नाराजगी की परवाह किए बिना और सामाजिक संकोच को छोड़कर, केवल नैतिक कर्तव्य के बोध से प्रेरित होकर पिंजरे का दरवाज़ा खोल देते हैं ताकि पक्षी आज़ाद हो सके। उनका यह कदम दिखाता है कि वे किसी की झूठी तसल्ली के लिए किसी जीव की स्वतंत्रता का हनन सहन नहीं कर सकते थे।

प्रश्न 6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ सबसे अधिक सार्थक और मार्मिक ताई के लिए प्रतीत होता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • मानवीय पीड़ा: यद्यपि मिट्ठू और नया तोता मूक जीव हैं और वे मनुष्यों की भाषा में संवाद नहीं कर सकते, लेकिन ताई एक मनुष्य हैं। मनुष्यों के लिए समाज और परिवार में बातचीत (संवाद) करना जीवन की सबसे प्राथमिक आवश्यकता है।
  • अकेलेपन की पराकाष्ठा: ताई का भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद वे एक विशाल घर में अकेली रहती हैं। उनके पास अपने मन के भावों, सुख-दुख या रोज़मर्रा की बातें साझा करने के लिए कोई इंसान नहीं है। उनका पूरा जीवन एक मौन शून्य में बदल चुका है।
  • तोते से संवाद का प्रयास: वे तोते (मिट्ठू) से भी संवाद स्थापित करने की कोशिश केवल इसलिए करती हैं क्योंकि इंसानों की दुनिया में वे पूरी तरह 'संवादहीन' हो चुकी हैं। अंत में नए तोते के आने पर भी जब वह पुरानी आत्मीयता से प्रतिक्रिया नहीं देता, तो ताई का यह संवादहीनता का दर्द और अधिक गहरा हो जाता है।

प्रश्न 7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

उत्तर: किसी भी घर की जीवंतता और उसकी सुंदरता वहाँ रहने वाले लोगों के आपसी प्रेम, चहल-पहल, संवाद और हँसी-मजाक से होती है, न कि केवल उसकी बड़ी-बड़ी दीवारों या ईंट-पत्थरों से। ताई का घर भौतिक रूप से बहुत बड़ा और पक्का था, लेकिन भीतर से वह पूरी तरह खाली हो चुका था। परिवार के सभी सदस्यों के चले जाने के कारण वहाँ केवल एक भयानक सन्नाटा पसरा रहता था। उस विशाल भवन में केवल दो ही जीवित प्राणी बचे थे— एक वृद्ध ताई और दूसरा पिंजरे में बंद मिट्ठू। आत्मीय जनों की अनुपस्थिति, उत्सवों के अभाव और जीवन की रौनक समाप्त हो जाने के कारण ही लेखक ने ताई के उस आलीशान लेकिन निर्जन घर को 'सूना खंडहर' कहा है।




मेरे प्रश्न

नीचे दिए गए उत्तरों के लिए सबसे उपयुक्त और सटीक प्रश्न का चयन निम्नलिखित रूप में किया गया है:


1. उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।

सही प्रश्न: प्रश्न क: ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

तर्क: दिया गया उत्तर स्पष्ट रूप से यह बताता है कि ताई के अकेलेपन (सूनेपन) को दूर करने का काम किसने किया। इसलिए 'प्रश्न क' इसका सबसे सटीक प्रश्न है।


2. उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।

सही प्रश्न: प्रश्न ख: ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

तर्क: उत्तर में ताई के लौटने से ठीक पहले घटित हुई एक अनपेक्षित घटना (अनहोनी) का उल्लेख है। 'प्रश्न क' लौटने के बाद की स्थिति पूछता है, जो कि असंगत है। अतः 'प्रश्न ख' ही उपयुक्त है।


3. उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।

सही प्रश्न: प्रश्न क: गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

तर्क: उत्तर में गाँववालों के मन के डर और उनकी चिंता का मुख्य कारण (सदमा लगने का भय) बताया गया है। यह 'प्रश्न क' के "क्यों चिंतित थे" का सीधा समाधान करता है।


4. उत्तर: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।

सही प्रश्न: प्रश्न ख: शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

तर्क: दिया गया उत्तर शीर्षक के गहरे अर्थ, अर्थवत्ता और प्रतीक (भावार्थ) को व्याख्यायित करता है। इसलिए 'प्रश्न ख' इसके लिए सबसे उपयुक्त प्रश्न बनता है।




मेरे अनुभव मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित रूप में प्रस्तुत हैं:

प्रश्न 1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं...” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

उत्तर: जब हम अपने घर, परिवार या किसी प्रिय वस्तु से दूर होते हैं, तो एक अवांछित भय और चिंता हमारे मन को निरंतर घेरे रहती है। यह चिंता हमारे अवचेतन मन में एक मानसिक तनाव पैदा करती है, जिसके कारण हम बाहरी माहौल (जैसे किसी उत्सव या न्यौते) का पूरा आनंद नहीं ले पाते। हमारा ध्यान बार-बार उसी बात पर केंद्रित रहता है। उदाहरण के लिए, जब मैं कभी अपनी किसी पालतू बिल्ली या परीक्षा के ज़रूरी नोट्स को घर पर छोड़कर बाहर जाता हूँ, तो बार-बार मन में विचार आता है कि कहीं बिल्ली भूखी न हो या नोट्स खो न जाएँ। यह चिंता व्यक्ति को मानसिक रूप से अस्थिर और असहज बनाए रखती है।

प्रश्न 2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

उत्तर: हाँ, मैं पूरी तरह मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी मनुष्यों की तरह ही गहरी संवेदनाएँ, भावनाएँ, सुख-दुख और प्रेम की समझ होती है, भले ही वे हमारी भाषा में बोल नहीं सकते।

व्यक्तिगत अनुभव: मेरे घर में एक पालतू कुत्ता है। एक बार जब मेरी तबीयत बहुत खराब थी और मैं बिस्तर पर उदास लेटा हुआ था, तब वह पूरे दिन खेलने या कूदने के बजाय चुपचाप मेरे बिस्तर के पास आकर बैठ गया। उसने अपना सिर मेरे पैर पर रख दिया और अपनी आँखों से अत्यंत सहानुभूतिपूर्ण भाव प्रकट करने लगा। उस दिन उसने भोजन भी सामान्य से बहुत कम खाया। जब मैं ठीक हो गया, तब उसकी आकृतियों और पूँछ हिलाने के तरीके से उसकी अत्यधिक खुशी साफ झलक रही थी। इस घटना से यह पूरी तरह सिद्ध होता है कि वे हमारी हर भावना को गहराई से महसूस करते हैं।

प्रश्न 3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके...” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

उत्तर: ताई को इस प्रकार के भ्रम में रखना अस्थायी रूप से व्यावहारिक लग सकता है, लेकिन नैतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह बिल्कुल अनुचित था। इसके पीछे निम्नलिखित तर्क हैं:

  • अस्थायी राहत बनाम स्थायी चोट: गनपत ने यह सुझाव ताई के अत्यधिक स्नेह और उनकी ढलती उम्र को देखकर दिया था ताकि उन्हें अचानक कोई गहरा मानसिक सदमा न लगे। यह एक तात्कालिक सुरक्षात्मक कदम था।
  • विश्वासघात और यथार्थ से दूरी: किसी को लंबे समय तक धोखे या भ्रम में रखना सही नहीं है। ताई का मिट्ठू के साथ एक गहरा आत्मिक और भावनात्मक संबंध था। जब नया तोता मिट्ठू की तरह उनके प्रति प्रतिक्रिया नहीं दे पाया, तो ताई का भ्रम टूट गया और उनका अकेलापन तथा दुख पहले से कहीं अधिक गहरा और पीड़ादायक हो गया। सच को छुपाने के बजाय यदि उन्हें धीरे-धीरे यथार्थ स्वीकार कराया जाता, तो वह अधिक उचित होता।

प्रश्न 4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

उत्तर: हाँ, जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जहाँ हमारी अपेक्षाएँ वास्तविक परिणामों से बिल्कुल भिन्न हो जाती हैं।

अनुभव: पिछले वर्ष मेरे दादाजी के जन्मदिन पर मैंने अपनी जेबखर्च से पैसे बचाकर उनके लिए एक बहुत ही आधुनिक डिजिटल कलाई घड़ी खरीदी। मैंने सोचा था कि वे इस नई तकनीक की घड़ी को देखकर अत्यंत प्रसन्न होंगे, खुशी से झूम उठेंगे और तुरंत इसे पहन लेंगे। लेकिन जब मैंने उन्हें वह उपहार दिया, तो उन्होंने मुस्कुराकर मुझे गले लगाया, पर घड़ी को एक तरफ रख दिया। उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें सुई वाली पुरानी साधारण घड़ियाँ ही पसंद हैं और वे इस डिजिटल स्क्रीन को ठीक से देख भी नहीं पाते। उस दिन मैंने सोचा कुछ और था, पर हुआ कुछ और। मुझे समझ आया कि हमारी पसंद हमेशा बड़ों की व्यावहारिक आवश्यकताओं से मेल खाए, यह जरूरी नहीं है।

प्रश्न 5. “मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर: हाँ, यह एक कड़वा सच है कि यदि किसी भी जीव को लंबे समय तक एक ही संकीर्ण दायरे या पिंजरे में बंद रखा जाए, तो वह अपनी स्वाभाविक आज़ादी, उड़ने की क्षमता और आत्मनिर्भरता को भूल जाता है। वह मानसिक रूप से पराधीनता (गुलामी) को ही अपनी नियति मान लेता है।

आस-पास का उदाहरण: हमारे पड़ोस में एक तोते को बचपन से ही पिंजरे में पाला गया था। एक दिन सफाई करते समय पिंजरे का दरवाज़ा खुला रह गया और वह बाहर आँगन में आ गया। लेकिन उसने खुले आसमान की ओर उड़ने का कोई प्रयास नहीं किया। वह वापस पिंजरे के ऊपर जाकर बैठ गया और दरवाज़ा खोलने की प्रतीक्षा करने लगा। इसका कारण यह था कि वह बाहरी दुनिया के खतरों (जैसे चील, बिल्ली का डर) से अपरिचित था और बिना किसी प्रयास के पिंजरे में भोजन पाने का आदी हो चुका था। यह स्थिति दर्शाती है कि लंबे समय की कैद जीवों की स्वाभाविक आज़ादी की चाहत को ही समाप्त कर देती है।