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HINDI CLASS- 9

CH-2(पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी)

CBSEChapter 2Solution

मेरे उत्तर मेरे तर्क

पाठ ‘क्या लिखूँ?’ (लेखक: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी) के अभ्यास प्रश्नों के सटीक उत्तर और उनके उपयुक्त तर्क नीचे दिए गए हैं:


1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?

सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना

तर्क: ए.जी. गार्डिनर के इस कथन के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि निबंध लेखन में बाहरी विषय (खूँटी) मात्र एक सहारा होता है। असली महत्त्व लेखक के अपने आंतरिक विचारों, मनोभावों और उसकी मानसिक स्थिति (हैट) का होता है। कोई भी विषय हो, लेखक के भाव ही उसे जीवंत बनाते हैं।


2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।” मॉन्टेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?

सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

तर्क: प्रसिद्ध फ्रांसीसी निबंधकार मॉन्टेन ने अपने जीवन में जो कुछ भी देखा, सुना और महसूस किया, उसे बिना किसी बाहरी बंधन या नियमों की परवाह किए स्वतंत्र रूप से लिपिबद्ध किया। उनकी यह शैली लेखक को अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित स्वच्छंद और स्वाभाविक लेखन की ओर प्रवृत्त करती है।


3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद...” यह तुलना किस पर आधारित है?

सही उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव

तर्क: नवयुवकों (तरुणों) के पास जीवन का लंबा भविष्य होता है, इसलिए वे आने वाले कल की कल्पनाओं और सुंदर अभिलाषाओं में जीते हैं। इसके विपरीत, वृद्धों के पास जीवन का एक लंबा संचित अनुभव होता है, जिसके कारण वे अपने बीते हुए अतीत की सुखद यादों में संतोष पाते हैं।


4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?

सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए

तर्क: लेखक को जब एक साथ दो अलग-अलग विषयों (दूर के ढोल सुहावने और समाज-सुधार) पर निबंध लिखने की चुनौती मिलती है, तो उन्हें अमीर खुसरो की याद आती है। खुसरो ने अपनी अनूठी प्रतिभा से एक ही पद्य में चार अलग-अलग महिलाओं की भिन्न इच्छाओं (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) को एक साथ पिरो दिया था। लेखक इसी युक्ति का उपयोग कर दोनों विषयों को एक करने का उपाय खोजते हैं।


5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?

सही उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है

तर्क: लेखक के अनुसार, मानव इतिहास में ऐसा कोई भी समय नहीं रहा जब समाज को सुधार की आवश्यकता न पड़ी हो। बुद्धदेव से लेकर महात्मा गांधी तक हर काल में महान समाज सुधारक हुए हैं, क्योंकि समय के साथ पुराने सुधार स्वयं दोष बन जाते हैं और फिर से नए सुधारों की आवश्यकता उत्पन्न हो जाती है।




मेरी समझ मेरे विचार

पाठ ‘क्या लिखूँ?’ के अंतर्गत दिए गए प्रश्नों के विस्तृत और प्रामाणिक उत्तर नीचे दिए गए हैं:

प्रश्न 1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

उत्तर: ए.जी. गार्डिनर और लेखक (पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी) के विचारों में निबंध के विषय की स्वतंत्रता और मानसिक स्थिति को लेकर थोड़ा अंतर दिखाई देता है:

  • ए.जी. गार्डिनर का विचार: गार्डिनर का मानना है कि निबंध लेखन के लिए विषय का कोई विशेष महत्त्व नहीं होता। लेखक किसी भी साधारण से साधारण विषय (जैसे खूँटी) पर भी अपने मन के सुंदर भावों को पिरोकर एक बेहतरीन निबंध लिख सकता है। उनके अनुसार, निबंधकार की मानसिक स्थिति ही मुख्य वस्तु होती है, विषय केवल एक बहाना या सहारा होता है।
  • लेखक (बख्शी जी) का विचार: लेखक गार्डिनर की बात से सहमत तो हैं, लेकिन वे व्यावहारिक कठिनाई को सामने रखते हैं। लेखक का मानना है कि जब किसी विशिष्ट विषय (जैसे 'दूर के ढोल सुहावने' या 'समाज-सुधार') पर निबंध लिखने का आदेश या आग्रह मिलता है, तब मन की वह स्वाभाविक और स्वच्छंद मानसिक स्थिति स्वतः उत्पन्न नहीं होती। ऐसे में विषय की सीमाएँ लेखक की कल्पना और विचारों को बांध देती हैं, जिससे स्वाभाविक लेखन कठिन हो जाता है।

प्रश्न 2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर: लेखक ने बिल्कुल सटीक कहा है कि युवा (तरुण) और वृद्ध दोनों ही वर्तमान समय से दुखी या असंतुष्ट रहते हैं, लेकिन उनकी इस असंतुष्टि के पीछे का मनोविज्ञान और कारण पूरी तरह अलग हैं:

  • तरुणों (युवाओं) की असंतुष्टि के कारण: युवा वर्ग भविष्योन्मुखी होता है। वे आने वाले समय को अपनी आकांक्षाओं और इच्छाओं के अनुरूप देखना चाहते हैं। वे वर्तमान व्यवस्था, पुरानी रूढ़ियों और धीमी प्रगति से संतुष्ट नहीं होते। वे समाज और देश में तेजी से बड़े बदलाव (क्रांति) देखना चाहते हैं। जब वर्तमान परिस्थितियाँ उनकी कल्पनाओं और महत्वाकांक्षाओं से मेल नहीं खातीं, तो वे असंतुष्ट और विद्रोही हो जाते हैं।
  • वृद्धों की असंतुष्टि के कारण: वृद्ध वर्ग अतीतमुखी होता है। उनके पास जीवन का एक लंबा अनुभव होता है और वे अपने बीते हुए कल (अतीत) को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। उन्हें वर्तमान समय की नई संस्कृति, नई जीवनशैली और युवाओं की सोच में केवल दोष और गिरावट दिखाई देती है। वे वर्तमान के बदलावों को स्वीकार नहीं कर पाते और अपने सुखद अतीत की स्मृतियों में ही खोए रहना चाहते हैं, जिससे वे वर्तमान से सदा असंतुष्ट रहते हैं।

प्रश्न 3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?

उत्तर: नमिता और अमिता लेखक से दो अलग-अलग और गंभीर विषयों पर निबंध लिखने का अनुरोध करती हैं:

  • सुझाए गए विषय: नमिता ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ विषय पर निबंध लिखवाना चाहती है, जबकि अमिता ‘समाज-सुधार’ जैसे गंभीर विषय पर निबंध लिखवाना चाहती है।
  • लेखक को आईं कठिनाइयाँ:
    1. इन दोनों विषयों की प्रकृति एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत थी। एक विषय (दूर के ढोल सुहावने) जहाँ कल्पना, भावुकता और काव्यात्मक अभिव्यक्ति की माँग करता था, वहीं दूसरा विषय (समाज-सुधार) गंभीर चिंतन, सामाजिक समस्याओं के विश्लेषण और गद्य के तार्किक स्वरूप की माँग करता था।
    2. निबंध शास्त्र के नियमों के अनुसार, एक अच्छे निबंध में किसी एक ही केंद्रीय विचार को बांधकर लिखना होता है। लेखक के लिए सबसे बड़ी कठिनाई यह थी कि वे इन दोनों बिल्कुल भिन्न विषयों को एक ही समय में, बिना अपनी स्वाभाविक मानसिक स्वतंत्रता को खोए, कैसे न्यायसंगत रूप से लिखें।

प्रश्न 4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?

उत्तर: निबंधशास्त्र के विद्वानों और आचार्यों ने एक प्रभावशाली और आदर्श निबंध लिखने के लिए निम्नलिखित मुख्य युक्तियाँ सुझाई हैं:

  • युक्तियाँ: आचार्यों के अनुसार, निबंध लिखने से पहले उसकी एक सुव्यवस्थित रूपरेखा (Outline) तैयार कर लेनी चाहिए। निबंध की भाषा शुद्ध, परिमार्जित और विषय के अनुकूल होनी चाहिए। विचारों में एक स्पष्ट क्रमबद्धता और तारतम्यता होनी चाहिए ताकि पाठक बंधा रहे। साथ ही, निबंध में विषय के समर्थन या स्पष्टीकरण के लिए उपयुक्त उदाहरणों, महापुरुषों के कथनों या ऐतिहासिक प्रसंगों का समावेश होना चाहिए।
  • मेरी व्यक्तिगत तैयारी: किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले मैं निम्नलिखित चरणों में तैयारी करता हूँ:
    1. सर्वप्रथम मैं विषय को गहराई से समझकर उससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों, विचारों और तर्कों को एक जगह मन में या रफ कागज़ पर संकलित कर लेता हूँ।
    2. इसके बाद मैं निबंध को तीन मुख्य भागों— प्रस्तावना (भूमिका), मुख्य विषय-वस्तु (विस्तार) और उपसंहार (निष्कर्ष) में विभाजित करके एक मानसिक ढांचा तैयार करता हूँ।
    3. विषय को आकर्षक बनाने के लिए मैं उससे जुड़े किसी प्रसिद्ध उद्धरण, कविता की पंक्ति या सूक्ति को खोजने का प्रयास करता हूँ ताकि उसे निबंध की शुरुआत में शामिल कर सकूँ।

प्रश्न 5. मॉन्टेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?

उत्तर: मॉन्टेन का यह कथन निबंध लेखन की आत्मा को प्रकट करता. है। निबंध लेखन में व्यक्तिगत अवलोकन (देखना), श्रवण (सुनना) और आत्मानुभूति (अनुभव) की उपयोगिता को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • मौलिकता और जीवंतता: जब कोई लेखक अपनी देखी, सुनी और स्वयं अनुभव की हुई बातों को लिखता है, तो उसके निबंध में कृत्रिमता या बनावटीपन नहीं होता। वह लेखन अत्यंत मौलिक, प्रामाणिक और जीवंत बन जाता है, जो सीधे पाठक के हृदय को छूता है।
  • अनुभव की गहराई: केवल किताबी ज्ञान या दूसरों के विचारों के आधार पर लिखा गया निबंध नीरस हो सकता है। इसके विपरीत, स्वयं के अनुभवों से उपजे विचार निबंध को एक अनोखा दृष्टिकोण और गहराई प्रदान करते हैं।
  • स्वाभाविक प्रवाह: अपनी अनुभूतियों को व्यक्त करते समय लेखक को शब्दों या विचारों के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। उसके मन के भाव एक बहती हुई नदी की तरह स्वाभाविक रूप से कागज़ पर उतर आते हैं, जिससे निबंध की शैली अत्यंत रोचक और सुबोध हो जाती है।