HINDI CLASS- 9
CH-12(घर की याद - भवानीप्रसाद मिश्र)
मेरे उत्तर मेरे तर्क (घर की याद - भवानीप्रसाद मिश्र)
प्रश्न 1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?
- (क) विदेश से मित्र के लिए
- (ख) युद्धभूमि से जनता के लिए
- (ग) जेल से परिवार के लिए
- (घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए
सटीक उत्तर: (ग) जेल से परिवार के लिए
कारण: भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था, जिसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। जेल प्रवास के दौरान सावन की बरसती रात में उन्हें अपने घर और परिवार के सदस्यों की तीव्र याद आई, जिसे उन्होंने इस कविता के रूप में व्यक्त किया।
प्रश्न 2. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?
- (क) उत्साह और आवेग
- (ख) भय और क्रोध
- (ग) साहस और उमंग
- (घ) चिंता और बेचैनी
सटीक उत्तर: (घ) चिंता और बेचैनी
कारण: बाहर लगातार हो रही बारिश कवि के अंतर्मन में चल रही यादों और दुखों की झड़ी को दर्शाती है। परिवार से दूर अकेले कारागार में रहने के कारण उनका मन अपनों की चिंता और मिलने की बेचैनी (व्याकुलता) से पूरी तरह घिर जाता है।
प्रश्न 3. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?
- (क) कमजोर और निष्क्रिय
- (ख) स्नेहमयी और दृढ़
- (ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय
- (घ) सरल और उदासीन
सटीक उत्तर: (ख) स्नेहमयी और दृढ़
कारण: कविता में माँ को ममता की मूरत (स्नेहमयी) बताया गया है जो अनपढ़ होने के बाद भी पत्र न लिख पाने की लाचारी में भी बच्चों से अगाध प्रेम करती है। साथ ही, जब पिता कवि की याद में भावुक होकर रो पड़ते हैं, तब माँ उन्हें ढांढस बंधाकर अपनी मानसिक दृढ़ता का परिचय देती है।
प्रश्न 4. (शेष विकल्प)
- (ग) दृढ़ और संवेदनशील
- (घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय
सटीक उत्तर: (ग) दृढ़ और संवेदनशील
कारण: 'वज्र-भुज' (लोहे जैसी मजबूत भुजाएं) पिता के शारीरिक-मानसिक रूप से सुदृढ़ होने को दर्शाती हैं, जबकि 'नवनीत-सा उर' (मक्खन जैसा कोमल हृदय) उनकी अत्यधिक भावुकता और संवेदनशीलता को प्रकट करता है।
प्रश्न 5. “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है?
- (क) पिता की कठोरता
- (ख) पिता की भावुकता
- (ग) वर्षा की तीव्रता
- (घ) पिता की निर्बलता
सटीक उत्तर: (ख) पिता की भावुकता
कारण: इस पंक्ति का आशय यह है कि कवि के पिता वैसे तो बहुत साहसी और मजबूत हैं, लेकिन अपने बच्चों के प्रति उनका प्रेम इतना गहरा है कि ज़रा सी भी अप्रिय बात होने पर या अपने पाँचवें बेटे (कवि भवानी) की याद आते ही वे पूरी तरह भावुक हो जाते हैं और उनकी आँखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ती है।
प्रश्न 6. “बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर” पंक्ति में ‘परिताप’ शब्द से क्या संकेत मिलता है?
- (क) घर का समृद्ध होना
- (ख) घर की सजावट
- (ग) घर में दुख का वातावरण
- (घ) घर की शांति
सटीक उत्तर: (ग) घर में दुख का वातावरण
कारण: 'परिताप' का अर्थ अत्यधिक दुख, संताप या कष्ट होता है। कवि की बहन अपने मायके (पिता के घर) खुशी-खुशी त्योहार मनाने आती है, लेकिन वहाँ अपने भाई भवानी को जेल में होने के कारण न पाकर पूरा परिवार शोक में डूबा मिलता है। इसलिए वह खुशी का घर दुख के घर (परिताप के घर) में बदल जाता है।
प्रश्न 7. “और कहना मस्त हूँ मैं” पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?
- (क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है।
- (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
- (ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है।
- (घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।
सटीक उत्तर: (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
कारण: कवि जेल में अकेलेपन और यातनाओं के कारण बहुत दुखी हैं, परंतु वे सावन के माध्यम से अपने पिता को संदेश भेजते हैं कि वे घर पर कहें कि 'मैं यहाँ मस्त हूँ।' वे ऐसा इसलिए कहते हैं ताकि उनके दुख का हाल जानकर उनके माता-पिता और परिवार के लोग दुखी न हों।
प्रश्न 8. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?
- (क) घर की शांति और सुरक्षा
- (ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध
- (ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया
- (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
सटीक उत्तर: (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
कारण: पूरी कविता का मुख्य विषय ही यही है कि स्वतंत्रता संग्राम के कारण जेल में बंद कवि को सावन की रात में अपने घर और परिवार की अत्यंत तीव्र याद आती है। वे कारागार के एकांत में अपनों से दूर होने के दर्द और गहरी मानसिक पीड़ा को ही इस कविता में प्रमुखता से व्यक्त करते हैं।
मेरी समझ मेरे विचार (विस्तृत प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिससे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।
उत्तर: कविता 'घर की याद' में कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने अपने पिता के व्यक्तित्व का एक अत्यंत सजीव और बहुआयामी चित्रण किया है। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- शारीरिक रूप से स्वस्थ और ऊर्जावान: वृद्धावस्था में भी कवि के पिता अत्यधिक फुर्तीले और ऊर्जावान हैं। वे आज भी दौड़ लगा सकते हैं, खिलखिलाकर हंस सकते हैं और मौत के सामने भी हिचकिचाते नहीं हैं।
- साहसी एवं निडर: वे स्वभाव से अत्यंत वीर और निडर हैं। उनकी आवाज़ में बादलों जैसी गर्जना है और उनके काम करने की शैली में आंधी जैसी गति है। शेर के सामने आ जाने पर भी वे भयभीत नहीं होते।
- संवेदनशील और भावुक हृदय: बाहर से वज्र जैसे कठोर और मजबूत दिखने वाले पिता भीतर से अत्यंत कोमल और भावुक हैं। अपने बच्चों से, विशेषकर अपने पाँचवें बेटे (कवि) से वे अगाध प्रेम करते हैं और उसकी याद आते ही उनकी आँखों से आंसुओं की धारा बह निकलती है।
- देशभक्त और धार्मिक प्रवृत्ति: वे नियमित रूप से गीता का पाठ करते हैं। उनके मन में देशप्रेम कूट-कूट कर भरा है, इसी कारण वे अपने बेटे के जेल जाने के निर्णय पर गर्व का अनुभव करते हैं।
प्रश्न 2. “दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
उत्तर:
कवि का संघर्ष और गुण: कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने स्वतंत्रता आंदोलन के कारण जेल की कठोर यातनाओं और अकेलेपन को सहन करते हुए भी अद्भुत मानवीय गुणों का परिचय दिया है:
- त्याग की भावना: कवि ने अपनी व्यक्तिगत खुशियों और परिवार के सुख का त्याग करके देश की आज़ादी के लिए जेल जाना स्वीकार किया, जो उनके महान त्याग को दर्शाता है।
- साहस और वीरता: कारागार की कठिन और दमनकारी परिस्थितियों के सामने वे झुकते नहीं हैं। वे स्वयं को "दुख डटकर ठेलने वाला" यानी विपरीत हालातों से मजबूती से लड़ने वाला सिद्ध करते हैं।
- धैर्य और मानसिक सुदृढ़ता: जेल में रहकर वे अकेलेपन के दर्द में तड़पते हैं, रोते हैं और रात भर जागते हैं, लेकिन फिर भी वे अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटते। वे धैर्य बनाए रखते हैं और सावन से कहते हैं कि उनके माता-पिता को उनका वास्तविक दुख मत बताना, बल्कि यही कहना कि वे वहाँ बहुत खुश और मस्त हैं।
प्रश्न 3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
उत्तर: कविता में लगातार बरसता हुआ पानी (वर्षा) केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि वह कवि के अंतर्मन की सघन पीड़ा का प्रतीक है:
- यादों का उद्दीपन: बाहर जैसे-जैसे पानी गिरता है, वैसे-वैसे कवि का मन अपने घर की यादों में डूबता चला जाता है। वर्षा की बूंदें उनके दिल में परिजनों के प्रति छिपे प्रेम को जगा देती हैं।
- अश्रुधारा से साम्यता: गगन से बरसती हुई पानी की धार और कवि की आँखों से बहते आंसुओं की धार एक रूप हो जाती है। कवि का घर पानी में तैरता हुआ सा महसूस होता है क्योंकि पूरा परिवार उनकी याद में रो रहा है।
- पीड़ा की निरंतरता: जिस प्रकार सावन का पानी अनवरत (लगातार) बरस रहा है, उसी प्रकार कवि के हृदय में भी अकेलेपन और अपनों से बिछड़ने का दुख लगातार बह रहा है।
प्रश्न 4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिससे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।
उत्तर:
कविता की पंक्तियाँ: जब कवि के पिता अपने पाँचवें बेटे की याद में व्याकुल होकर रोने लगते हैं, तब माँ उन्हें संभालते हुए कहती हैं:
"हैं, कहाँ? मैं रोती कहाँ हूँ?
धीर मैं खोती कहाँ हूँ?
लीक पर वह चल रहा है,
यह तुम्हारी कोख का ही फल रहा है।"
भाव स्पष्टीकरण: इन पंक्तियों से माँ की असीम आंतरिक और भावनात्मक दृढ़ता का परिचय मिलता है। माँ खुद एक बेटे के विछोह के गहरे दर्द में डूबी हैं, लेकिन वे अपने पति को टूटते हुए देखकर स्वयं के आंसुओं को रोक लेती हैं (मैं रोती कहाँ हूँ)। वे बहुत हिम्मत के साथ अपने पति को ढांढस बंधाती हैं और कहती हैं कि भवानी ने जेल जाकर आपकी ही परंपरा (लीक) को निभाया है। यह आपकी कोख और परवरिश का गौरव है। माँ की यह धीरता संकट के समय पूरे परिवार को मानसिक संबल प्रदान करती है।
प्रश्न 5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?
उत्तर:
सबसे प्रभावी अंश: हमें कविता का वह अंश सबसे अधिक भावनात्मक और मर्मस्पर्शी लगता है जहाँ कवि सावन को दूत बनाकर अपने घर संदेश भेजते हैं और कहते हैं:
"और कहना मस्त हूँ मैं,
कात्ने में व्यस्त हूँ मैं,
वज़न सत्तर सेर मेरा
और भोजन ढेर मेरा।
कूदता हूँ, खेलता हूँ,
दुख डटकर ठेलता हूँ,
और कहना मस्त हूँ मैं,
यूँ न कहना अस्त हूँ मैं।"
कारण: यह अंश अत्यधिक प्रभावी और भावुक करने वाला इसलिए है क्योंकि इसमें एक बेटे का अपने माता-पिता के प्रति परम और निस्वार्थ प्रेम दिखाई देता है। कवि स्वयं जेल में अकेलेपन के अंधकार से जूझ रहे हैं, उनका मानसिक स्वास्थ्य और मनोबल 'अस्त' (कमजोर) हो चुका है, लेकिन वे सावन को कसम देते हैं कि घर जाकर उनके रोने और तड़पने की बात मत बताना। वे अपनी वास्तविक पीड़ा को छिपाकर खुद को स्वस्थ और खुश बताते हैं ताकि उनके वृद्ध माता-पिता उनके दुख को सोच-सोच कर अपने प्राण न गंवा बैठें। यह त्याग और अपनों के प्रति संवेदनशीलता पाठक के हृदय को गहराई से छू लेती है।