HINDI CLASS- 9
CH-11(झाँसी की रानी)
मेरे उत्तर मेरे तर्क (झाँसी की रानी)
प्रश्न 1. “झाँसी की रानी” कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
- (क) देश का स्वाभिमानी (या देश में स्वतंत्रता का संचार)
- (ख) विद्रोह की चिंगारी
- (ग) स्वाधीनता का भय
- (घ) भारत की युवावस्था
सटीक उत्तर: (क) देश का स्वाभिमानी / जोश और देशभक्ति का पुनरुत्थान
कारण: लंबे समय की गुलामी के कारण भारतवासी निराश और हताश हो चुके थे, जिससे देश निर्जीव (बूढ़ा) सा प्रतीत हो रहा था। रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य ने देशवासियों में खोया हुआ आत्म-सम्मान, जोश और आज़ादी की तीव्र इच्छा जगा दी, जिसे कवयित्री ने 'नई जवानी' कहा है।
प्रश्न 2. लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
- (क) विनम्रता
- (ख) शोभायुक्त (सुंदर और चंचल)
- (ग) सहिष्णुता
- (घ) कठोरता
सटीक उत्तर: (ख) शोभायुक्त
कारण: बचपन में लक्ष्मीबाई अत्यंत सुंदर, तेजस्वी, चंचल और लाडली थीं। उनके इसी मनमोहक, कांतियुक्त और शोभायुक्त स्वरूप तथा बाल-सुलभ चंचलता के कारण उनके पिता और सगे-संबंधी उन्हें प्यार से 'छबीली' कहकर पुकारते थे।
प्रश्न 3. “बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है—
- (क) अंग्रेजों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
- (ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
- (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
- (घ) रानी के जीवन में उदासी होना
सटीक उत्तर: (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
कारण: झाँसी के राजा गंगाधर राव का असमय और निःसंतान निधन हो गया था। राजा की इस आकस्मिक मृत्यु से झाँसी राज्य का भविष्य अंधकारमय हो गया, जिसे 'दीप बुझना' के रूप में व्यक्त किया गया है।
प्रश्न 4. “इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
- (क) असहयोग आंदोलन
- (ख) भारत छोड़ो आंदोलन
- (ग) 1857 की क्रांति
- (घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
सटीक उत्तर: (ग) 1857 की क्रांति
कारण: सुभद्रा कुमारी चौहान जी की यह कविता भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम यानी सन् 1857 की ऐतिहासिक क्रांति पर आधारित है, जिसमें मंगल पांडे, नाना धुंधूपंत, तांतिया तोपे और रानी लक्ष्मीबाई जैसे अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।
प्रश्न 5. “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
- (क) नवाबों के लिए
- (ख) जनरल डलहौजी के लिए
- (ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
- (घ) ब्रिटिश राज के लिए
सटीक उत्तर: (घ) ब्रिटिश राज के लिए
कारण: कविता की इस पंक्ति में 'यह' शब्द ईस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेज़ों/ब्रिटिश राज) के लिए प्रयुक्त हुआ है। जब अंग्रेज़ शुरू में भारत आए थे, तब वे केवल एक साधारण व्यापारी थे और यहाँ के राजा-महाराजाओं से व्यापार करने के लिए दया की भीख माँगते थे। परंतु धीरे-धीरे उन्होंने पूरे भारत पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।
मेरी समझ मेरे विचार (विस्तृत प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1. ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर:
प्रिय खेल: रानी लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल साधारण बच्चों जैसे नहीं थे। वे बचपन में नकली युद्ध रचना, व्यूह की रचना करना, शिकार खेलना, सैन्य किले तोड़ना, तलवारबाजी, तीरंदाजी और घुड़सवारी जैसे युद्ध-कौशल वाले खेल खेलती थीं। बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी ही उनकी बचपन की सहेलियाँ थीं।
बचपन की भिन्नता: उनका बचपन अन्य सामान्य लड़कियों से बिल्कुल अलग था। जहाँ आम लड़कियाँ गुड़िया-गुड्डों के खेल खेलती थीं और घर के कामों में व्यस्त रहती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई बचपन से ही वीर पुरुषों की तरह हथियार चलाना और युद्ध कलाएँ सीख रही थीं। उन्हें बचपन से ही शिवाजी जैसी महान वीरों की वीरता की कहानियाँ ज़बानी याद थीं।
प्रश्न 2. “किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से झाँसी के राजा गंगाधर राव (रानी लक्ष्मीबाई के पति) की अचानक बीमारी के कारण हुई आकस्मिक मृत्यु और उसके बाद झाँसी पर आए गहरे संकट की ओर संकेत किया गया है। विवाह के कुछ समय बाद ही राजा के निःसंतान मरने से रानी अत्यंत कम उम्र में विधवा हो गईं। इस दुखद घटना के कारण रानी के जीवन में गहरा अंधकार छा गया और अंग्रेज़ों को झाँसी को हड़पने का कुटिल अवसर मिल गया।
प्रश्न 3. “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
उत्तर:
एकता का महत्व: स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में इस सामाजिक एकता का अत्यधिक ऐतिहासिक महत्व है। 'महल' समाज के उच्च, अमीर वर्ग और राजा-महाराजाओं का प्रतीक है, जबकि 'झोंपड़ी' गरीब, आम जनता और किसानों का प्रतीक है।
1857 की क्रांति में जब अंग्रेज़ों के अत्याचार बढ़े, तो महलों के राजाओं और झोंपड़ियों के गरीब नागरिकों दोनों ने मिलकर एक साथ विद्रोह का बिगुल फूंका। इस एकता ने यह साबित कर दिया कि आज़ादी की लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे देश की थी। जब समाज के सभी वर्ग एक हो गए, तभी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई और देश में राष्ट्रवाद की एक मज़बूत लहर पैदा हुई।
प्रश्न 4. “सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
उत्तर:
'नीलाम छापते' शब्द का संकेत: यह शब्द अंग्रेज़ों की अत्यंत क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक साम्राज्यवादी नीति की ओर संकेत करता है, जिसके तहत वे भारतीय राजघरानों की संपत्ति की सार्वजनिक रूप से बोली लगवाते थे।
किसकी नीलामी और क्यों: जब अंग्रेज़ किसी भारतीय राज्य पर कब्ज़ा कर लेते थे (जैसे झाँसी, नागपुर, सतारा), तो वे वहाँ के राजा-रानियों के कीमती गहने, रेशमी कपड़े और शाही ठाट-बाठ के सामानों को कलकत्ता के बाज़ारों में सरेआम नीलाम करते थे। वे अपने समाचार पत्रों में इन नीलामियों के विज्ञापन खुलेआम छापते थे ताकि भारतीय शासकों का स्वाभिमान कुचला जा सके, उन्हें पूरी दुनिया के सामने जलील किया जा सके और उनकी धन-दौलत लूटकर अंग्रेज़ सरकार का खजाना भरा जा सके।
प्रश्न 5. “अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?
उत्तर: केवल 23 वर्ष की अल्पायु में रानी लक्ष्मीबाई ने जो अदम्य साहस और वीरता दिखाई, वह किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं थी। कविता के आधार पर उन्हें निम्नलिखित अद्भुत गुणों के कारण 'अवतारी' (ईश्वरीय अवतार) कहा गया है:
- अद्भुत वीरता और युद्ध कौशल: वे पुरुषों के वेश में मर्दानगी के साथ दुश्मनों से लड़ीं। उन्होंने अकेले ही सैकड़ों अंग्रेज़ सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। उनकी तलवारबाज़ी देखकर दुश्मन कमांडर भी हैरान रह जाते थे।
- अदम्य साहस और निर्भीकता: पीठ पर दत्तक पुत्र को बाँधकर, दोनों हाथों में तलवारें लेकर घोड़े पर सवार होकर युद्ध लड़ना उनके अलौकिक साहस को दिखाता है।
- देश के लिए सर्वोच्च बलिदान: इतनी कम उम्र में अपनी जान की परवाह न करते हुए देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे देना उन्हें एक साधारण मानव से ऊपर उठाकर देवी या अवतार के रूप में पूजनीय बनाता है।