HINDI CLASS- 8: मल्हार
CHAPTER-6: (एक टोकरी भर मिट्टी )
एक टोकरी भर मिट्टी – मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए।
1. ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
* वह अहाते का विस्तार करना चाहता था।
2. वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?
* विनती और नम्रता से।
3. वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?
* लगाव
4. कहानी का अंत कैसा है?
* सुखद
* प्रेरणादायक
* सकारात्मक
(ख) आपने ये उत्तर क्यों चुने?
1. ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाना चाहता था। उसकी इसी इच्छा के कारण उसने वृद्धा की झोंपड़ी हटाने का प्रयास किया।
2. वृद्धा ने अत्यंत विनम्रता और आदर के साथ ज़मींदार से मिट्टी ले जाने की अनुमति माँगी। उसने किसी प्रकार का झगड़ा या विरोध नहीं किया।
3. पोती को अपने घर और झोंपड़ी से बहुत अधिक लगाव था। इसी कारण उसने घर छूटने के बाद खाना-पीना तक छोड़ दिया था।
4. अंत में ज़मींदार को अपनी गलती का एहसास हो जाता है। वह पश्चाताप करता है, क्षमा माँगता है और झोंपड़ी वापस कर देता है। इसलिए कहानी का अंत सुखद, सकारात्मक और प्रेरणादायक है।
एक टोकरी भर मिट्टी – मिलकर करें मिलान
वाक्यों का उनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलान
1. अब यही उसकी पोती इस वृद्धावस्था में एकमात्र आधार थी।
→ वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी।
2. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।
→ ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दाँवपेच से झोंपड़ी पर कब्जा किया।
3. आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी हैं।
→ वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया।
4. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।
→ धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवता और करुणा से दूर कर दिया था।
5. कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी।
→ अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी।
6. उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?
→ वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है।
7. कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।
→ वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया।
8. उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी।
→ झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों की याद से भावुक हो गई।
एक टोकरी भर मिट्टी – पंक्तियों पर चर्चा
(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी हैं। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
इन पंक्तियों में वृद्धा केवल मिट्टी के भार की बात नहीं कर रही है। वह ज़मींदार को उसके अन्याय और लालच का बोध करा रही है। एक टोकरी मिट्टी का भार तो वह उठा नहीं सका, फिर पूरी झोंपड़ी पर किए गए अन्याय का नैतिक बोझ वह जीवनभर कैसे सह सकेगा। यह कथन ज़मींदार की अंतरात्मा को झकझोर देता है और उसे अपनी गलती का एहसास हो जाता है।
(ख) “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज़ हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई...”
इस प्रसंग से ज़मींदार के स्वभाव में परिवर्तन की शुरुआत दिखाई देती है। पहले वह अहंकारी और कठोर था, लेकिन वृद्धा की विनम्रता और असहाय स्थिति देखकर उसके मन में दया का भाव जागा। जब वह स्वयं टोकरी उठाने का प्रयास करता है और असफल रहता है, तब उसे अपनी भूल का एहसास होने लगता है। यही घटना उसके हृदय-परिवर्तन का कारण बनती है।
एक टोकरी भर मिट्टी – सोच-विचार के लिए
(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
मेरे विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है। वह गरीब, असहाय और कमजोर होने के बावजूद अत्यंत बुद्धिमान, धैर्यवान और आत्मसम्मानी है। उसने किसी प्रकार के झगड़े या बल का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी सूझ-बूझ और विनम्रता से ज़मींदार को उसकी गलती का एहसास कराया। उसका चरित्र हमें धैर्य, विवेक और नैतिक साहस की शिक्षा देता है।
(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
वृद्धा की पोती को अपनी झोंपड़ी और घर से बहुत अधिक लगाव था। जब झोंपड़ी उनसे छीन ली गई तो वह मानसिक रूप से बहुत दुखी हो गई। वह बार-बार अपने पुराने घर लौटने की जिद करती थी और इसी कारण उसने खाना-पीना छोड़ दिया था।
(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
ज़मींदार ने कानूनी चालें चलकर और वकीलों की सहायता लेकर झोंपड़ी पर कब्जा किया। उसने धन के प्रभाव का उपयोग करते हुए अदालत से झोंपड़ी अपने नाम करवा ली और वृद्धा को वहाँ से निकलवा दिया।
(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।” यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की क्रिया का क्या अर्थ है?
ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने का अर्थ है कि उसने वृद्धा को अपनी बात कहने की अनुमति दे दी। यह संकेत था कि वह उसकी विनती सुनने के लिए तैयार है।
(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? बाद में उसमें क्या परिवर्तन आया?
पहले ज़मींदार अहंकारी, स्वार्थी और कठोर हृदय का व्यक्ति था। उसे केवल अपने लाभ की चिंता थी और उसने वृद्धा की भावनाओं की उपेक्षा की। लेकिन टोकरी उठाने की घटना के बाद उसे अपने अन्याय का एहसास हुआ। उसके भीतर दया, पश्चाताप और मानवता की भावना जागृत हुई तथा उसका व्यवहार विनम्र और संवेदनशील बन गया।
(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?
वृद्धा के शब्दों ने ज़मींदार की अंतरात्मा को झकझोर दिया। उसे समझ में आ गया कि उसने लालच और अहंकार में आकर एक असहाय स्त्री के साथ अन्याय किया है। अपनी गलती का एहसास होने पर उसे गहरा पश्चाताप हुआ। इसलिए उसने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस कर दी।