HINDI CLASS- 8: मल्हार
CHAPTER-4: (हरिद्वार)
हरिद्वार – मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए।
1. “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं” का क्या अर्थ है?
* लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
2. “वैराग्य और भक्ति का उदय होता था” इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?
* मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
3. “पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर था” इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?
* संतुष्टि में सुख होता है।
4. “एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।” यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?
* सादगी और आत्मनिर्भरता
* स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
5. लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः किस प्रकार का था?
* आध्यात्मिक
* प्राकृतिक
6. पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?
* सरलता और चित्रात्मकता
(ख) आपने ये उत्तर क्यों चुने?
1. लेखक वृक्षों की उदारता का वर्णन करते हुए उन्हें सज्जनों के समान बताते हैं, जो बदले में केवल भलाई करते हैं।
2. हरिद्वार की पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य ने लेखक के मन में भक्ति, शांति और वैराग्य का भाव उत्पन्न किया।
3. लेखक को प्रकृति के बीच साधारण भोजन में भी अत्यधिक आनंद मिला। इससे स्पष्ट होता है कि सुख संतोष में निहित है।
4. गंगा तट पर स्वयं भोजन बनाना सादगी, आत्मनिर्भरता तथा प्रकृति के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
5. लेखक ने हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का भी गहन अनुभव किया।
6. पत्र में सरल, सहज और चित्रात्मक भाषा का प्रयोग किया गया है जिससे दृश्य सजीव हो उठते हैं।
हरिद्वार – मिलकर करें मिलान
शब्दों का उनके उपयुक्त संदर्भों से मिलान
1. हरिद्वार
→ यह उत्तराखंड राज्य में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल है जहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है।
2. गंगा
→ भारत की प्रमुख नदी, जिसे भागीरथी, त्रिपथगा, अलकनंदा आदि नामों से भी जाना जाता है।
3. भगीरथ
→ अयोध्या के प्रसिद्ध राजा जिन्होंने तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर लाया।
4. चण्डिका
→ दुर्गा का एक रूप।
5. भागवत
→ अठारह पुराणों में से एक प्रसिद्ध पुराण जिसमें श्रीकृष्ण से संबंधित कथाएँ हैं।
6. दालचीनी
→ एक सुगंधित वृक्ष की छाल जिसका उपयोग औषधि और मसाले के रूप में किया जाता है।
हरिद्वार – पंक्तियों पर चर्चा
(क) “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री आदि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रकट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।”
इन पंक्तियों में लेखक हरिद्वार की पवित्रता और प्राकृतिक विशेषता का वर्णन करते हैं। उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि यह भूमि इतनी पवित्र है कि यहाँ की साधारण घास भी सुगंधित है। लेखक ने अतिशयोक्ति और भावात्मक शैली के माध्यम से हरिद्वार की महिमा का चित्रण किया है।
(ख) “अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।”
इन पंक्तियों में लेखक वृक्षों की महानता का वर्णन करते हैं। वृक्ष अपने जीवनकाल में फल, फूल, छाया और लकड़ी देकर मानव का कल्याण करते हैं। मृत्यु के बाद भी उनकी लकड़ी, कोयला और राख लोगों के काम आती है। इस प्रकार वृक्ष परोपकार और त्याग के प्रतीक हैं।
हरिद्वार – सोच-विचार के लिए
(क) “और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ...” लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है?
यह वाक्य दर्शाता है कि लेखक हरिद्वार की यात्रा से अत्यंत प्रभावित हुए थे। वहाँ से लौट आने के बाद भी उनका मन उसी स्थान की स्मृतियों में बसा हुआ था। किसी सुंदर और प्रिय स्थान से जुड़ाव होने पर ऐसा अनुभव स्वाभाविक है।
(ख) “पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।” लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है?
आज के समाज में ऐसे संतोषी लोग कम दिखाई देते हैं, परंतु अभी भी अनेक लोग सेवा और संतोष की भावना से कार्य करते हैं। धार्मिक स्थलों, आश्रमों और सामाजिक संस्थाओं में ऐसे व्यक्तियों को देखा जा सकता है जो धन से अधिक सेवा को महत्व देते हैं।
(ग) “मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है।” लेखक ने उस स्थान को ‘टिकने योग्य’ क्यों कहा है?
वह स्थान शांत, स्वच्छ और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर था। वहाँ से ठंडी हवा आती थी तथा आसपास का वातावरण मन को आनंद और शांति प्रदान करता था। इन विशेषताओं के कारण लेखक ने उसे रहने योग्य स्थान कहा।
(घ) “फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।” इस वाक्य से वृक्षों के महत्व के बारे में क्या पता चलता है?
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि वृक्ष मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वे हमें भोजन, औषधि, छाया, ईंधन, लकड़ी और शुद्ध वायु प्रदान करते हैं। उनका प्रत्येक भाग किसी-न-किसी रूप में मनुष्य के काम आता है। इसलिए वृक्षों का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है।