HINDI CLASS- 8: मल्हार
CHAPTER-2: (दो गौरैया)
दो गौरैया – मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए।
1. पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि—
* घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं।
* घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं।
2. कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
* जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे।
3. गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
* पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।
4. माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
* माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ।
* माँ को पिताजी के प्रयास व्यर्थ लगते थे।
5. कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
* अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना।
(ख) आपने ये उत्तर क्यों चुने?
1. घर में अनेक पक्षी, चूहे, बिल्ली, कबूतर, चमगादड़ आदि आते-जाते रहते थे। इसलिए पिताजी घर को सराय कहते थे।
2. कहानी में घर पर सबसे अधिक अधिकार जीव-जंतुओं का दिखाई देता है। वे स्वतंत्र रूप से वहाँ रहते और आते-जाते थे।
3. पिताजी गौरैयों को घर से निकालना चाहते थे, जबकि माँ उनके प्रति सहानुभूति रखती थीं और उन्हें रहने देना चाहती थीं।
4. माँ को विश्वास था कि गौरैयाँ अपना घोंसला नहीं छोड़ेंगी। इसलिए वे पिताजी के प्रयासों पर मुसकराती थीं।
5. गौरैयाँ बार-बार भगाए जाने पर भी लौट आती थीं। यह दृढ़ता, धैर्य और निरंतर प्रयास का प्रतीक है।
दो गौरैया – मिलकर करें मिलान
वाक्यों का उनके उचित अर्थ से मिलान
1. वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं।
→ पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था।
2. आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं।
→ आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं।
3. वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।
→ चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते।
4. वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं।
→ पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं।
5. पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे।
→ पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए।
6. इतने में रात पड़ गई।
→ कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया।
7. जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।
→ गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों।
दो गौरैया – पंक्तियों पर चर्चा
(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
माँ का आशय है कि जब तक गौरैयों ने घर को अपना स्थायी निवास नहीं बनाया था, तब तक उन्हें भगाना आसान था। लेकिन अब उन्होंने घोंसला बना लिया है और संभवतः अंडे भी दे दिए हैं। इसलिए वे इस स्थान को छोड़कर नहीं जाएँगी।
(ख) “एक दिन अंदर न घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
यह पिताजी का विचार था। उन्हें विश्वास था कि यदि गौरैयों को लगातार घर में आने से रोका जाए तो वे परेशान होकर किसी दूसरी जगह चली जाएँगी। यह उनके दृढ़ और जिद्दी स्वभाव को दर्शाता है।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
इस कथन से पता चलता है कि किसी को उसके रहने के स्थान से हटाने का सबसे कठोर तरीका उसका घर नष्ट करना है। कहानी में पिताजी गुस्से में यह बात कहते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हो जाता है।
दो गौरैया – सोच-विचार के लिए
(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा? क्यों?
मुझे कहानी में माँ का पात्र सबसे अच्छा लगा। वे दयालु, संवेदनशील और पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम रखने वाली थीं। उन्होंने बार-बार गौरैयों को बचाने का प्रयास किया और उनके प्रति सहानुभूति दिखाई। उनका व्यवहार हमें जीवों के प्रति करुणा रखना सिखाता है।
(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
गौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बनाया था। यह स्थान सुरक्षित, ऊँचा और बाहरी खतरों से बचा हुआ था। इसलिए उन्होंने वहीं अपना घर बनाने का निर्णय लिया।
(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं?
हाँ, पशु-पक्षी भी परिवार और घर का महत्व समझते हैं। कहानी में गौरैयों ने घोंसला बनाया, अंडे दिए और अपने बच्चों की देखभाल की। जब उनके बच्चे घोंसले में थे, तब वे बार-बार उसी स्थान पर लौटती रहीं। इससे उनके परिवार-प्रेम का पता चलता है।
(घ) “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
इस कथन से पिताजी का दृढ़ निश्चयी, जिद्दी और आत्मविश्वासी स्वभाव प्रकट होता है। वे किसी काम को अधूरा छोड़ना नहीं चाहते थे और लगातार प्रयास करते रहते थे।
(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
शुरुआत में गौरैयाँ प्रसन्न होकर चहचहाती और गाना गाती थीं। लेकिन जब पिताजी बार-बार उन्हें भगाने लगे और घोंसला तोड़ने का प्रयास किया, तब वे उदास और चुप रहने लगीं। वे कमजोर और चिंतित दिखाई देने लगीं क्योंकि उन्हें अपने घोंसले और बच्चों की चिंता थी।
(च) कहानी में गौरैयाँ किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश करती थीं? सूची बनाइए।
1. खुले दरवाजे से।
2. दरवाजे के नीचे की खाली जगह से।
3. रोशनदान से।
4. टूटे हुए शीशे वाले रोशनदान से।
(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
यह कहानी लेखक स्वयं सुना रहा है। इसका पता “मैं”, “मेरे घर”, “मैंने देखा”, “मैं अवाक् रह गया” जैसे शब्दों से चलता है। इसलिए यह प्रथम पुरुष शैली में लिखी गई कहानी है।
(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
माँ समझती थीं कि गौरैयों ने घर में अपना घोंसला बना लिया है और संभवतः अंडे भी दे दिए हैं। वे जानती थीं कि कोई भी पक्षी अपने बच्चों और घर को छोड़कर आसानी से नहीं जाता। इसलिए वे बार-बार कह रही थीं कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी।