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HINDI CLASS- 8: मल्हार

CHAPTER-1: (स्वदेश)

CBSEChapter-1 Solutions

स्वदेश – मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए।

1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—
* संवेदनहीनता से
* कठोरता से

2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
* देश के प्रति प्रेम

3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
* देश के समस्त नागरिकों के लिए

4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
* जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है

(ख) आपने ये उत्तर क्यों चुने?

1. “जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।”
यह पंक्ति बताती है कि बिना साहस के कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकता। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए साहस और दृढ़ निश्चय आवश्यक हैं।

2. “जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।”
जो व्यक्ति स्वयं में तथा दूसरों में उत्साह और प्रेरणा नहीं जगा सकता, उसका जीवन उद्देश्यहीन माना जाता है। जोश जीवन को सार्थक बनाता है।

3. “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।”
यहाँ कवि अपने देश की महानता का वर्णन कर रहे हैं। भारत की ज्ञान-परंपरा, संस्कृति और सभ्यता से पूरा विश्व प्रभावित रहा है।

4. “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
इसका अर्थ है कि मनुष्य के पास अपनी प्रगति और सफलता के लिए आवश्यक शक्ति और साधन मौजूद हैं। केवल साहस, परिश्रम और इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।


स्वदेश – मिलकर करें मिलान

पंक्तियों का उनके सही भाव या संदर्भ से मिलान

1. जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।

→ जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो, वह किसी लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकता।

2. जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।

→ जो स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकता, उसका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।

3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।

→ जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।

4. सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।

→ जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन में सफलता के लिए साहस और इच्छाशक्ति आवश्यक है।


स्वदेश – पंक्तियों पर चर्चा

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”

इन पंक्तियों में कवि जीवन की नश्वरता का वर्णन करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को एक दिन मृत्यु का सामना करना पड़ता है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन को सार्थक बनाते हुए देश और समाज के लिए कार्य करना चाहिए। जैसे दीपक की लौ पर परवाना जल जाता है, वैसे ही जीवन का अंत निश्चित है।

(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

इन पंक्तियों में कवि आत्मविश्वास और देशभक्ति का संदेश देते हैं। मनुष्य के भीतर अपार शक्ति होती है जिससे वह बड़े से बड़ा कार्य कर सकता है। साथ ही कवि कहते हैं कि जिस व्यक्ति के हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है, उसका हृदय पत्थर के समान कठोर और संवेदनहीन है।

(ग) “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

कवि के अनुसार भावनाओं और प्रेम से रहित हृदय जीवित नहीं माना जा सकता। देशप्रेम मनुष्य के श्रेष्ठ भावों में से एक है। जिस व्यक्ति के मन में अपने देश के प्रति प्रेम, सम्मान और अपनापन नहीं है, उसका हृदय पत्थर के समान निर्जीव और कठोर है।


स्वदेश – सोच-विचार के लिए

(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?

इस पंक्ति में देश के सभी नागरिकों को राजा-रानी कहा गया है। कवि का आशय है कि देश पर प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है। देश की उन्नति, सुरक्षा और विकास की जिम्मेदारी भी सभी नागरिकों की है। इसलिए हर व्यक्ति अपने देश का राजा या रानी है।

(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?

‘संसार-संग’ चलने का अर्थ है समाज के साथ मिल-जुलकर रहना, दूसरों के सुख-दुख में भाग लेना तथा समय के साथ आगे बढ़ना। जो व्यक्ति समाज से कटकर रहता है, दूसरों की सहायता नहीं करता और केवल अपने बारे में सोचता है, वह लोगों का प्रेम और सम्मान प्राप्त नहीं कर पाता। इसलिए संसार उसका नहीं हो पाता।

(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो, क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं?

इस पंक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति अपने देश की महानता, संस्कृति और उपकारों को देखकर भी प्रभावित नहीं होता, वह धरती पर बोझ के समान है। ऐसे व्यक्ति में कृतज्ञता और देशभक्ति का अभाव होता है। कवि ऐसे लोगों की आलोचना करते हैं।

(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं?

देश-प्रेम का अर्थ है अपने देश के प्रति सम्मान, निष्ठा और समर्पण की भावना रखना। देश के कानूनों का पालन करना, उसकी संस्कृति का आदर करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना तथा देश की उन्नति के लिए कार्य करना सच्चा देश-प्रेम है। देश-प्रेम केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि अच्छे कर्मों से भी प्रकट होता है।

(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।

इस कविता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

1. कविता में देशभक्ति की प्रबल भावना व्यक्त हुई है।
2. भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली है।
3. कविता में प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक संदेश दिया गया है।
4. तुकांत शब्दों के प्रयोग से कविता में मधुरता और लय उत्पन्न हुई है।
5. कवि ने साहस, कर्तव्य, राष्ट्रप्रेम और आत्मविश्वास जैसे आदर्श मूल्यों पर बल दिया है।
6. कविता में ओज गुण तथा भावात्मकता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।