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HINDI CLASS- 10

CHAPTER-9 (लखनवी अंदाज़)

CBSEChapter 9 प्रश्न अभ्यास

अध्याय : लखनवी अंदाज़

प्रश्न 1. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?

उत्तर :

लेखक जब रेलगाड़ी के डिब्बे में नवाब साहब के सामने बैठा था, तब नवाब साहब के व्यवहार से उसे महसूस हुआ कि वे बातचीत करने के इच्छुक नहीं हैं। नवाब साहब बार-बार अपनी आँखें फेर लेते थे और लेखक की ओर ध्यान नहीं देते थे। वे अपने साथ रखे खीरे को बड़े ध्यान से काटने, छीलने और मसाला लगाने में लगे रहे। उन्होंने लेखक से कोई बातचीत आरम्भ नहीं की और न ही उसकी ओर विशेष रुचि दिखाई। उनके इन हाव-भावों से लेखक समझ गया कि नवाब साहब उससे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं।


प्रश्न 2. नवाब साहब ने खीरा ही चल से काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंततः सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है?

उत्तर :

नवाब साहब ने खीरे को बड़े सलीके से काटा, उस पर नमक-मिर्च लगाई और फिर उसे खाने के बजाय केवल सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वे अपनी नवाबी शान और नज़ाकत का प्रदर्शन करना चाहते थे। वे लेखक के सामने अपनी विशेष शैली और उच्चता दिखाना चाहते थे।

उनका यह व्यवहार उनके दिखावटी, बनावटी और अहंकारी स्वभाव को प्रकट करता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि वे अपनी प्रतिष्ठा और नवाबी ठाठ को बनाए रखने के लिए अनावश्यक आडंबर करने में विश्वास रखते थे।


प्रश्न 3. बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है? यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर :

मेरे विचार से बिना विचार, घटना और पात्रों के कोई प्रभावशाली कहानी नहीं लिखी जा सकती। किसी भी कहानी की आत्मा उसके पात्र, घटनाएँ और विचार होते हैं। इन्हीं के माध्यम से कहानी का उद्देश्य, संदेश और रोचकता पाठकों तक पहुँचती है।

यद्यपि ‘लखनवी अंदाज़’ में कोई बड़ी घटना नहीं है, फिर भी नवाब साहब और लेखक जैसे पात्र तथा उनके व्यवहार के माध्यम से एक रोचक स्थिति उत्पन्न होती है। इससे स्पष्ट होता है कि छोटी-सी घटना और साधारण पात्र भी कहानी को प्रभावशाली बना सकते हैं।

अतः मैं यशपाल के विचार से आंशिक रूप से सहमत हूँ कि सामान्य घटनाओं पर भी कहानी लिखी जा सकती है, परन्तु पूर्णतः बिना पात्रों, घटनाओं और विचारों के कहानी संभव नहीं है।


प्रश्न 4. आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?

उत्तर :

मैं इस निबंध का नाम “नवाबी शान का प्रदर्शन” रखना चाहूँगा, क्योंकि पूरी रचना में नवाब साहब के व्यवहार, उनके दिखावटी अंदाज़ और बनावटी नवाबी ठाठ का चित्रण किया गया है।

इसके अतिरिक्त इस निबंध के लिए निम्नलिखित नाम भी उपयुक्त हो सकते हैं—

  • नवाबी नज़ाकत
  • दिखावे की दुनिया
  • खीरे की कहानी
  • एक नवाब का अंदाज़
  • आडंबर और अभिमान

पाठ का सारांश

‘लखनवी अंदाज़’ के लेखक यशपाल हैं। इस व्यंग्यात्मक रचना में लेखक ने लखनऊ की नवाबी संस्कृति और उसके दिखावटी व्यवहार पर हल्का-फुल्का व्यंग्य किया है। रेलयात्रा के दौरान लेखक की मुलाकात एक नवाब साहब से होती है। नवाब साहब खीरे को बड़े सलीके और नज़ाकत से तैयार करते हैं, लेकिन उसे खाते नहीं, केवल सूँघकर बाहर फेंक देते हैं। उनके इस व्यवहार के माध्यम से लेखक ने आडंबर, दिखावे और झूठी शान पर व्यंग्य किया है। यह रचना मनोरंजक होने के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार की विसंगतियों को भी उजागर करती है।