HINDI CLASS- 10

CHAPTER-8 (बालगोबिन भगत)

CBSEChapter 8 प्रश्न अभ्यास

अध्याय : बालगोबिन भगत

प्रश्न 1. खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?

उत्तर :

बालगोबिन भगत एक गृहस्थ किसान थे, फिर भी लोग उन्हें साधु कहते थे। इसका कारण उनका आदर्श चरित्र और आध्यात्मिक जीवन था। उनकी प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—

इन्हीं गुणों के कारण लोग उन्हें साधु के समान सम्मान देते थे।



प्रश्न 2. भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?

उत्तर :

भगत की पुत्रवधू उनके प्रति अत्यंत श्रद्धा और सम्मान रखती थी। वह जानती थी कि भगत वृद्ध हो चुके हैं और उन्हें देखभाल की आवश्यकता है। पुत्र की मृत्यु के बाद भी भगत ने अत्यंत धैर्य और वैराग्य का परिचय दिया था। पुत्रवधू को उनकी चिंता रहती थी, इसलिए वह उन्हें अकेले छोड़ना नहीं चाहती थी।



प्रश्न 3. भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं?

उत्तर :

भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर सामान्य लोगों की तरह विलाप नहीं किया। उन्होंने मृत्यु को ईश्वर की इच्छा और आत्मा का परमात्मा से मिलन माना। वे शोक के स्थान पर भजन गाने लगे। उन्होंने अपने दुःख को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से स्वीकार किया और ईश्वर की महिमा का गुणगान किया। इस प्रकार उन्होंने अपने वैराग्य, धैर्य और आध्यात्मिक विश्वास का परिचय दिया।



प्रश्न 4. भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर :

बालगोबिन भगत का व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली था। वे मध्यम कद के, दुबले-पतले और तेजस्वी व्यक्ति थे। उनके चेहरे पर शांति और संतोष झलकता था।

वेशभूषा :

उनका पूरा व्यक्तित्व एक सच्चे संत और भक्त का आभास कराता था।



प्रश्न 5. बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?

उत्तर :

बालगोबिन भगत की दिनचर्या अत्यंत अनुशासित और आध्यात्मिक थी। वे प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर स्नान करते, भजन-कीर्तन करते और फिर खेतों में काम करने जाते। दिनभर कठिन परिश्रम करने के बाद भी वे ईश्वर-स्मरण में लगे रहते थे। उनकी नियमितता, कर्मठता और भक्ति देखकर लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे।



प्रश्न 6. पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर :

बालगोबिन भगत का गायन अत्यंत मधुर और प्रभावशाली था। उसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—



प्रश्न 7. कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर :

बालगोबिन भगत कई सामाजिक रूढ़ियों और परंपराओं को नहीं मानते थे। इसके उदाहरण निम्नलिखित हैं—

इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि वे रूढ़िवादी मान्यताओं से ऊपर उठकर जीवन जीते थे।



प्रश्न 8. धान रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर-लहरियाँ किस तरह चमत्कृत कर देती थीं? उस माहौल का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर :

धान रोपाई के समय खेतों में काम करने वाले किसान कठिन परिश्रम कर रहे होते थे। चारों ओर हरियाली, पानी से भरे खेत और प्रकृति की सुंदरता दिखाई देती थी। ऐसे समय में बालगोबिन भगत के मधुर भजन वातावरण में गूँज उठते थे।

उनकी स्वर-लहरियाँ सुनकर किसानों की थकान दूर हो जाती थी। पूरा वातावरण भक्तिमय और आनंदमय बन जाता था। खेतों में काम करने वाले लोग भी उनके गीतों में तल्लीन हो जाते थे। ऐसा लगता था मानो प्रकृति स्वयं उनके भजनों के साथ गुनगुना रही हो।

इस प्रकार भगत का गायन धान रोपाई के साधारण वातावरण को भी उत्साह, आनंद और भक्ति से भर देता था।



पाठ का सारांश

‘बालगोबिन भगत’ पाठ के लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी हैं। इस संस्मरण में लेखक ने बालगोबिन भगत के सरल, आध्यात्मिक और आदर्श जीवन का चित्रण किया है। वे एक किसान होते हुए भी संत-स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके जीवन में भक्ति, त्याग, सादगी और मानवता का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों का विरोध किया और अपने आचरण से लोगों को प्रेरणा दी। यह पाठ हमें सादगी, भक्ति, मानवता और कर्मठता का संदेश देता है।