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HINDI CLASS- 10

CHAPTER-10 (एक कहानी यह भी))

CBSEChapter 10 प्रश्न अभ्यास

अध्याय : एक कहानी यह भी

लेखिका : मन्नू भंडारी

प्रश्न 1. लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?

उत्तर :

मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व के निर्माण में उनके परिवार के अनेक सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विशेष रूप से उनके माता-पिता का प्रभाव उनके जीवन पर गहराई से पड़ा।

  • पिता का प्रभाव : उनके पिता प्रगतिशील, शिक्षाप्रेमी और समाज-सुधारक विचारों वाले व्यक्ति थे। उन्होंने मन्नू भंडारी को स्वतंत्र रूप से सोचने, शिक्षा प्राप्त करने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
  • माता का प्रभाव : उनकी माता सरल, सहनशील, त्यागमयी तथा पारंपरिक भारतीय नारी थीं। उनसे लेखिका को संवेदनशीलता, सहनशीलता और पारिवारिक मूल्यों की शिक्षा मिली।
  • मनु जी का प्रभाव : मनु जी के संपर्क में आकर लेखिका के मन में राष्ट्रप्रेम, समाजसेवा तथा स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति जागरूकता उत्पन्न हुई।

इन सभी व्यक्तियों के प्रभाव ने लेखिका के व्यक्तित्व को संवेदनशील, स्वतंत्र विचारों वाला और आत्मविश्वासी बनाया।


प्रश्न 2. इस आत्मकथा में लेखिका के पिता ने रसोई को ‘भटियारखाना’ कहकर क्यों संबोधित किया है?

उत्तर :

लेखिका के पिता आधुनिक और प्रगतिशील विचारों वाले व्यक्ति थे। वे लड़कियों को केवल घर और रसोई तक सीमित रखने के विरोधी थे। उनका मानना था कि स्त्रियों को भी पुरुषों के समान शिक्षा प्राप्त कर समाज में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

इसी सोच के कारण वे रसोईघर को व्यंग्यात्मक रूप से ‘भटियारखाना’ कहते थे। उनके अनुसार स्त्रियों का जीवन केवल खाना बनाने और घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए। वे चाहते थे कि उनकी बेटियाँ शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बनें और समाज में अपनी पहचान स्थापित करें।


प्रश्न 3. वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?

उत्तर :

लेखिका को यह जानकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि उनका बाल-विवाह हो चुका था। बचपन में ही उनका विवाह कर दिया गया था, परंतु उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी।

जब बाद में उन्हें इस घटना के बारे में बताया गया तो वे आश्चर्यचकित रह गईं। उन्हें अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं हुआ कि उनका विवाह इतनी छोटी आयु में हो चुका था। यह घटना उस समय की सामाजिक कुरीतियों और रूढ़ियों को दर्शाती है।


प्रश्न 4. लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर :

मन्नू भंडारी और उनके पिता दोनों ही स्वतंत्र विचारों वाले व्यक्ति थे, फिर भी कई विषयों पर उनके विचारों में मतभेद दिखाई देता था।

पिता जी स्त्री-शिक्षा और महिला स्वतंत्रता के समर्थक थे, लेकिन वे अपने विचारों को व्यवहार में पूरी तरह लागू नहीं कर पाते थे। दूसरी ओर लेखिका जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण स्वतंत्रता और समान अधिकार चाहती थीं।

लेखिका कई सामाजिक रूढ़ियों और परंपराओं का विरोध करती थीं। वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती थीं। इसी कारण कभी-कभी उनके और उनके पिता के बीच वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो जाते थे।

हालाँकि इन मतभेदों के बावजूद दोनों के बीच गहरा प्रेम, सम्मान और विश्वास बना रहा।


प्रश्न 5. इस आत्मकथा के आधार पर स्वतंत्रता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मनु जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।

उत्तर :

इस आत्मकथा में स्वतंत्रता आंदोलन के समय का राष्ट्रीय वातावरण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उस समय देश अंग्रेजी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा था। देशभर में देशभक्ति, जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन की लहर फैल रही थी।

महिलाएँ भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लेने लगी थीं। समाज में शिक्षा, समानता और राष्ट्रीय चेतना का विकास हो रहा था।

मनु जी ने इस वातावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने महिलाओं को जागरूक बनाने, उन्हें सामाजिक बंधनों से मुक्त करने तथा राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उनके व्यक्तित्व में देशप्रेम, साहस, नेतृत्व क्षमता और समाजसेवा की भावना दिखाई देती है।

मनु जी ने महिलाओं में आत्मविश्वास जगाया और उन्हें राष्ट्रीय आंदोलनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।


पाठ का सारांश

‘एक कहानी यह भी’ प्रसिद्ध साहित्यकार मन्नू भंडारी की आत्मकथात्मक रचना है। इस पाठ में लेखिका ने अपने बचपन, पारिवारिक वातावरण, शिक्षा, सामाजिक परिस्थितियों और जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों का वर्णन किया है। लेखिका के पिता प्रगतिशील विचारों के व्यक्ति थे, जिन्होंने उन्हें शिक्षा और स्वतंत्र सोच की प्रेरणा दी। पाठ में बाल-विवाह, स्त्री-शिक्षा, महिला स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता आंदोलन के समय की सामाजिक परिस्थितियों का यथार्थ चित्रण मिलता है। यह रचना हमें आत्मनिर्भरता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता का संदेश देती है।